बारां / नरेश गुनानी/ग्रामीण अंचलों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बारां जिला प्रशासन और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) ने मिलकर एक नवाचार की शुरुआत की है। ‘मिशन सामर्थ्य-समर्थ युवा’ नाम से शुरू की गई इस संयुक्त पहल के तहत सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालयों को हाई-टेक ‘सामर्थ्य केंद्रों’ में बदला गया है, जहां ग्रामीण बच्चों को शहरों जैसी डिजिटल शिक्षा और करियर काउंसलिंग की सुविधा मिल रही है।
11 केंद्रों पर नियमित संवादात्मक कक्षाएं शुरू
परियोजना के प्रारंभिक चरण में बारां जिले के सभी आठ ब्लॉकों से 12 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों का चयन किया गया था। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों और बजट के आधार पर 11 केंद्र पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। इन केंद्रों पर 15 अगस्त से नियमित रूप से ऑडियो-विजुअल (संवादात्मक) माध्यम से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
जिला सूचना अधिकारी पूनम पाटनी के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में औसतन 25 से 30 विद्यार्थियों का समूह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। वर्तमान में इन 11 सक्रिय केंद्रों पर लगभग 500 विद्यार्थी नामांकित हैं, जो इस डिजिटल मंच का लाभ ले रहे हैं।
केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से संचालित हो रही हैं लाइव कक्षाएं
जिलाधिकारी बालमुकुंद असावा के नेतृत्व में तैयार किए गए इस मॉडल का मुख्य केंद्र पुराने सिविल लाइन क्षेत्र (श्रीराम स्टेडियम के पास) स्थित राजकीय बालिका विद्यालय में स्थापित किया गया है।
- केंद्रीय नियंत्रण कक्ष: यहां से विषय विशेषज्ञ शिक्षक एक साथ सभी संबद्ध स्कूलों में लाइव और इंटरैक्टिव कक्षाएं लेते हैं।
- शिक्षकों की कमी का समाधान: दूरदराज के क्षेत्रों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अध्यापकों की कमी को दूर करने के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रही है। एक ही विशेषज्ञ शिक्षक एक साथ कई स्कूलों के बच्चों को पढ़ाते हैं और उनके सवालों का लाइव समाधान करते हैं।
एनटीपीसी की सीएसआर पहल से मजबूत डिजिटल ढांचा
इस परियोजना के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एनटीपीसी ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) योजना के तहत तकनीकी और वित्तीय सहयोग दिया है। इसके तहत केंद्रों पर:
- उच्च गति वाली समर्पित इंटरनेट लीज लाइन,
- निर्बाध बिजली आपूर्ति (पावर बैकअप),
- आधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम और स्मार्ट स्क्रीन स्थापित किए गए हैं।
पाठ्यक्रम: किताबी ज्ञान से आगे, सर्वांगीण विकास पर जोर
जिलाधिकारी बालमुकुंद असावा ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन 45-45 मिनट की दो कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जबकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सत्र भी जोड़े जाते हैं। यह मंच केवल नियमित स्कूली पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हैं:
- सामान्य अध्ययन (General Studies)
- स्पोकन इंग्लिश और इंग्लिश ग्रामर
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
- नियमित करियर काउंसलिंग और मार्गदर्शन सत्र
बालिकाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान
इस पहल में कक्षा 10 से 12 तक की छात्राओं पर खास ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसका मकसद ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना और उन्हें करियर के बेहतर अवसरों से जोड़ना है, ताकि वे उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में शहरी विद्यार्थियों के साथ बराबरी से प्रतिस्पर्धा कर सकें।