राजस्थान के जालौर जिले के तोड़मी गांव में जल संकट: एक साल से पानी को तरस रहे ग्रामीण और मवेशी
Written By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 2, 2025
जालौर, राजस्थान – राजस्थान में गर्मी ने दस्तक दे दी है और इसके साथ ही कई इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। लेकिन जालौर जिले के आहोर विधानसभा क्षेत्र के तोड़मी गांव की हालत कुछ ज्यादा ही गंभीर है। यहां के ग्रामीण और पशु बीते 12 महीनों से पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। स्थिति इतनी विकट है कि लोग खारा पानी पीने को मजबूर हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
एक साल से बंद है नर्मदा पाइपलाइन से जल आपूर्ति
तोड़मी गांव में नर्मदा परियोजना के तहत जलापूर्ति की व्यवस्था थी, लेकिन पिछले एक साल से पाइपलाइन से पानी आना बंद हो गया है। गांव के देवासी समुदाय के लोग खासतौर पर इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं। महिलाओं को सिर पर मटके लादकर कई किलोमीटर दूर स्थित बेरों और कुओं से पानी लाना पड़ रहा है।
अवैध कनेक्शनों ने बिगाड़ी व्यवस्था
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कुछ हिस्सों में नर्मदा पाइपलाइन से अवैध कनेक्शन लगाए गए हैं, जिसके कारण पाइपलाइन में दबाव नहीं बन पा रहा और गांव तक पानी नहीं पहुंच रहा। इस कारण तोड़मी जैसे कई गांवों की जलापूर्ति बुरी तरह चरमरा गई है।

पशुपालकों की मुश्किलें
गांव के पशुपालक बताते हैं कि मवेशियों को भी पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। गर्मी के इस मौसम में मवेशियों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई पशु बीमार हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बड़ी संख्या में पशु हानि हो सकती है।
प्रशासन की अनदेखी
ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और जल विभाग से शिकायत की, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ना तो अवैध कनेक्शन हटाए जा रहे हैं और ना ही पाइपलाइन की मरम्मत की जा रही है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- नर्मदा पाइपलाइन की तुरंत मरम्मत की जाए और जल आपूर्ति बहाल की जाए।
- अवैध कनेक्शनों को हटाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- गांव में हैंडपंप, कुएं जैसे वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था की जाए।
यह जल संकट न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य और जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उनके रोजगार, शिक्षा और पशुपालन जैसी बुनियादी गतिविधियों को भी ठप कर चुका है। अब देखना यह है कि कब प्रशासन इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाता है।

