राजस्थान के जर्जर विद्यालय भवनों का होगा कायाकल्प: शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में दी कार्ययोजना की जानकारी
जयपुर, 30 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
राजस्थान सरकार प्रदेश के राजकीय विद्यालयों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर बड़े कदम उठाने जा रही है। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की कि राज्य के जर्जर विद्यालय भवनों की मरम्मत चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नए बनने वाले भवनों के लिए ‘एक्सपायरी डेट’ (अंतिम उपयोग तिथि) भी निर्धारित की जाएगी।
भवनों की होगी ‘बर्थ’ और ‘डेथ’ डेट निर्धारित
शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि भविष्य में बनने वाले विद्यालय भवनों की निर्माण तिथि के साथ-साथ उनकी मरम्मत और अंतिम उपयोग तिथि (End-of-use date) भी तय की जाएगी।
- लाभ: इससे भवनों की समयबद्ध निगरानी संभव होगी।
- सुरक्षा: समय सीमा समाप्त होने पर किसी भी अनहोनी से पहले ही भवनों को सुरक्षित रूप से जमींदोज किया जा सकेगा।
आईटीआई और पॉलिटेक्निक करेंगे ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ऑडिट व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
- पुरानी व्यवस्था: पहले केवल 30 लाख रुपये से अधिक लागत वाले भवनों की ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा थर्ड पार्टी ऑडिट होती थी।
- नई व्यवस्था: अब छोटे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के लिए आईटीआई (ITI) और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के माध्यम से निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाएगी।
सर्वे रिपोर्ट: 3,768 भवन जर्जर, 41 हजार से अधिक को मरम्मत की दरकार
अगस्त 2025 में जिला कलेक्टरों के माध्यम से कराए गए सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े सदन में रखे गए:
| कुल सर्वेक्षित विद्यालय | 45,365 |
| जर्जर घोषित भवन | 2,558 |
| जर्जर घोषित किए जाने शेष | 1,210 |
| वृहद मरम्मत की आवश्यकता वाले स्कूल | 41,178 |
शिक्षा मंत्री ने बताया कि जर्जर घोषित भवनों को एक माह के भीतर ढहाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
बजट और संसाधन: केंद्र से 1000 करोड़ का आश्वासन
मदन दिलावर ने जानकारी दी कि मरम्मत कार्यों के लिए केंद्र सरकार के परियोजना अनुमोदन बोर्ड (PAB) को प्रस्ताव भेजा गया है, जहाँ से 1000 करोड़ रुपये की राशि मिलने का आश्वासन मिला है। इसके अतिरिक्त:
- राज्य मद (2025-26): 2,000 विद्यालयों की मरम्मत हेतु 17,497.51 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- SDRF मद: बाढ़ और अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त 20,383 विद्यालयों के लिए जिला कलेक्टरों द्वारा मरम्मत कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
भविष्य में जलभराव और सीलन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भवनों में वाटर प्रूफिंग और छतों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, निर्माण के समय ही छतों पर उचित ढलान देने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब निर्माण कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता और जिम्मेदारी बरती जाएगी।
विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के जवाब में शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया कि छात्रों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।