राजस्थान की सियासत में तकरार तेज़: गहलोत-भजनलाल शर्मा आमने-सामने

राजस्थान की सियासत में तकरार तेज़: गहलोत-भजनलाल शर्मा आमने-सामने
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया प्रदेश का माहौल

रिपोर्ट: महेश गुप्ता 
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 04,2025

राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच चल रही जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते दो हफ्तों से लगातार दोनों नेता एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं, जिससे प्रदेश की सियासी फिजा में तल्खी और बढ़ गई है।

अशोक गहलोत का हमला: योजनाओं की अनदेखी का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए।
गहलोत ने लिखा कि मौजूदा सरकार उनके कार्यकाल में शुरू की गई विकास योजनाओं को नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई जनकल्याणकारी योजनाएं बिना किसी ठोस कारण के बंद कर दी गई हैं।
गहलोत ने राज्य में बुनियादी सुविधाओं की कमी, खासकर बिजली आपूर्ति, को लेकर चिंता जताई और सीएम से इस पर हस्तक्षेप करने की अपील की।

भजनलाल शर्मा का पलटवार: आंकड़ों के बिना भ्रम फैलाने का आरोप

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहलोत के पत्र पर सीकर में एक सार्वजनिक मंच से जवाब दिया
उन्होंने कहा, “अशोक गहलोत सिर्फ आरोप लगाते हैं कि बिजली नहीं आ रही, लेकिन यह नहीं बताते कि कहां नहीं आ रही।”
सीएम शर्मा ने कहा कि गहलोत को पहले अपने कार्यकाल के आंकड़े देखने चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पिछले डेढ़ साल में उनकी सरकार ने बिजली उत्पादन और कनेक्शन वितरण में गहलोत सरकार से बेहतर प्रदर्शन किया है।

“ऐसे सवाल जनता को गुमराह करने वाले”: भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री ने गहलोत के आरोपों को जनता को गुमराह करने वाला बताया और कहा कि

“जब तक यह साबित न हो कि हमारी सरकार पिछली सरकार से कमजोर रही है, तब तक इस तरह के बयान भ्रम फैलाने जैसे हैं।”

सियासी टकराव गहराने के आसार

गहलोत जहां लगातार जनहित की अनदेखी का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं भजनलाल शर्मा अपनी सरकार की उपलब्धियों और पारदर्शिता का हवाला देकर पलटवार कर रहे हैं।
यह जुबानी जंग अब महज आरोपों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश की जनता के बीच बहस का विषय बन चुकी है।

क्या असर होगा इस सियासी जंग का?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि

  • आने वाले दिनों में यह तकरार और बढ़ सकती है।
  • आगामी निकाय चुनावों और पंचायत चुनावों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
  • जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि कौन सच्चाई के साथ खड़ा है और कौन राजनीति के लिए आंकड़ों से खेल रहा हैं।

राजस्थान की राजनीति में फिलहाल सियासी जंग तेज़ हो चुकी है।
जहां एक तरफ गहलोत विकास योजनाओं की अनदेखी का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं भजनलाल शर्मा अपनी सरकार की परफॉर्मेंस और आंकड़ों के दम पर जवाबी हमला कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि यह टकराव किस दिशा में जाता है और इसका लाभ या नुकसान किसे होता है।

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