राजस्थान की ग्रामीण महिलाएं बनेंगी ‘सोलर दीदी’: राजीविका और बेयरफुट कॉलेज, तिलोनिया के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
जयपुर, 06 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
राजस्थान में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) और अजमेर स्थित बेयरफुट कॉलेज (तिलोनिया) के बीच मंगलवार को ‘सोलर दीदी’ प्रशिक्षण एवं आजीविका सशक्तिकरण के लिए एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रमुख उपस्थिति और हस्ताक्षर
यह एमओयू नेहा गिरि (राज्य मिशन निदेशक, राजीविका) और सौम्या किदाम्बी (निदेशक एवं सीईओ, बेयरफुट कॉलेज) के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर ग्रामीण विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रेया गुहा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विभाग की सचिव पुष्पा सत्यानी और राजीविका की परियोजना निदेशक (प्रशासन) प्रीती सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
क्या है ‘सोलर दीदी’ पहल?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
- चयन: राजीविका के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं का चयन इस विशेष प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।
- प्रशिक्षण अवधि: चयनित महिलाओं को बेयरफुट कॉलेज, तिलोनिया में 40 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- पाठ्यक्रम: महिलाओं को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उपकरणों के संचालन, सुरक्षा मानकों, वायरिंग, ट्रबलशूटिंग और फील्ड एक्सपोज़र का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
परियोजना के दूरगामी लाभ
यह पहल न केवल महिलाओं को रोजगार देगी, बल्कि ग्रामीण राजस्थान के बुनियादी ढांचे में भी सुधार करेगी:
- स्वतंत्र तकनीशियन: प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं अपने समुदाय में सौर मरम्मत और रखरखाव (Maintenance) तकनीशियन के रूप में कार्य करेंगी।
- सरकारी योजनाओं को गति: यह कदम ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत स्थापित सौर प्रणालियों की समयबद्ध मरम्मत और देखभाल सुनिश्चित करेगा।
- स्थायी आजीविका: प्रशिक्षित ‘सोलर दीदियों’ को पंचायतों और स्थानीय संस्थानों से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें सेवा-आधारित आय के नियमित अवसर मिल सकें।
- ऊर्जा दक्षता: ग्रामीण क्षेत्रों में सौर उपकरणों की उम्र बढ़ेगी और ऊर्जा की बर्बादी कम होगी।
अधिकारियों का दृष्टिकोण
राजीविका के अनुसार, यह समझौता महिला सशक्तिकरण और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से समावेशी ग्रामीण विकास की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अधिकारियों का मानना है कि यह नवाचार न केवल ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा, बल्कि राजस्थान को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति की ओर ले जाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

