रोजगार और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का नया रोडमैप
जयपुर, 25 मार्च 2026
| लोकेंद्र सिंह शेखावत
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान औद्योगिक विकास के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश में निवेश के लिए एक सुदृढ़ ईको-सिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से ‘राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026’ लागू की है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य राजस्थान को देश-विदेश में एक विश्वसनीय और ‘फ्यूचर रैडी’ इंडस्ट्रियल डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है।
विजन: आत्मनिर्भर भारत और राइजिंग राजस्थान
यह नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘राइजिंग, रिलायबल एण्ड रिसेप्टिव राजस्थान’ के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार की गई है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्पों को सिद्ध करने में सहायक होगी। नीति के माध्यम से संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग, उन्नत लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और संतुलित क्षेत्रीय विकास पर विशेष बल दिया गया है।
चार मॉडल्स के जरिए होगा विकास
निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक पार्कों को चार विशिष्ट मॉडलों पर विकसित किया जाएगा:
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- मॉडल-A: रीको द्वारा आवंटित भूमि पर पूर्णतः निजी डेवलपर द्वारा विकास।
- मॉडल-B: 80% भूमि विकासकर्ता की और 20% भूमि रीको द्वारा निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।
- मॉडल-C: संपूर्ण भूमि की व्यवस्था स्वयं विकासकर्ता द्वारा की जाएगी।
- मॉडल-D: यह पूरी तरह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित होगा।
अनिवार्यता: किसी भी औद्योगिक पार्क के लिए कम से कम 50 एकड़ क्षेत्रफल और न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी।
हरित विकास और आर्थिक प्रोत्साहन
पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं:
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- प्रदूषण नियंत्रण: सीईटीपी (CETP) पर होने वाले व्यय की 50% प्रतिपूर्ति (अधिकतम 12.5 करोड़ रुपये प्रति पार्क) सरकार करेगी।
- पूंजीगत अनुदान: प्रथम 10 डेवलपर्स को सामान्य अवसंरचना पर 20% अनुदान दिया जाएगा।
- 100 एकड़ तक: 20 करोड़ रुपये
- 100 से 250 एकड़: 30 करोड़ रुपये
- 250 एकड़ से अधिक: 40 करोड़ रुपये
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बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
सरकार औद्योगिक पार्कों तक बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। पार्क के निकटतम संपर्क मार्ग के निर्माण में 60:40 का व्यय अनुपात रहेगा (60% सरकार और 40% विकासकर्ता), जिसमें सरकार का अधिकतम अंशदान 3 करोड़ रुपये तक होगा।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस और अतिरिक्त छूट
पारदर्शिता और सुशासन के लिए ‘राज निवेश पोर्टल’ के माध्यम से आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण किया जाएगा। नीति के तहत मिलने वाले अन्य प्रमुख लाभ:
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- विद्युत शुल्क: कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा पर 7 वर्ष तक 100% छूट।
- स्टाम्प एवं कन्वर्जन शुल्क: 25% की विशेष छूट।
- रिप्स-2024 (RIPS): प्लग-एंड-प्ले ऑफिस कॉम्प्लेक्स और कॉमन यूटिलिटी सेंटर्स के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन।
