नरेश गुनानी
जयपुर, 15 मई 2026 — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए प्रदेश को ऊर्जा प्रदाता राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा की बचत ही उत्पादन का सबसे सस्ता और प्रभावी विकल्प है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से कार्यक्रम में पहुंचकर ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का कड़ा संदेश दिया।
मुख्य आकर्षण और घोषणाएं:
- ऊर्जा बचत एक जनआंदोलन: मुख्यमंत्री ने पेट्रोल-डीजल की बचत को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि राजकीय वाहनों के संयमित उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
- अक्षय ऊर्जा में सिरमौर राजस्थान: राजस्थान वर्तमान में सौर ऊर्जा उत्पादन में देश का नेतृत्व कर रहा है। प्रदेश में 828 गीगावाट सौर ऊर्जा और 284 गीगावाट पवन ऊर्जा की विशाल संभावनाएं मौजूद हैं।
- लक्ष्य 2030 और 2047: सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट और वर्ष 2047 तक 290 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत राज्य में 250 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, 1000 से अधिक सरकारी भवनों का सौर्यकरण (Solarization) किया जा चुका है।
निवेशकों के लिए ‘पधारो म्हारे देश’ का आह्वान
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि राजस्थान निवेश के लिए सबसे अनुकूल राज्य है। राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 के माध्यम से सौर, पवन, बायो-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अब ‘पावरहाउस’ बनने की राह पर है और निवेशकों को सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा।
कृषि और भंडारण पर जोर
- कुसुम योजना: कृषि क्षेत्र को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए 4000 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं और 6500 मेगावाट का आवंटन प्रक्रिया में है।
- एनर्जी स्टोरेज: भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 10 गीगावाट भंडारण क्षमता का लक्ष्य है। वर्तमान में 6000 मेगावाट बैटरी स्टोरेज क्षमता का आवंटन किया जा चुका है।
ऊर्जा राज्य मंत्री का संबोधन
ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने कहा कि नागरिकों को जागरूक कर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री कुसुम और फास्ट चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क से राजस्थान ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।
”ईंधन के संयमित उपभोग की आदत से ही आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त होगी। राजस्थान गैर-परंपरागत ऊर्जा उत्पादन में असीम संभावनाओं वाला प्रदेश है।”
— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
इस कॉन्क्लेव में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित देश-दुनिया के ऊर्जा विशेषज्ञों और प्रमुख निवेशकों ने भाग लिया।
इस कॉन्क्लेव की मुख्य थीम और चर्चाओं के बारे में क्या आप किसी विशेष प्रोजेक्ट (जैसे ग्रीन हाइड्रोजन या कुसुम योजना) पर अधिक विस्तृत जानकारी चाहते हैं?