राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) से प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म और उन्नत चिकित्सा सेवाओं को मिलेगा नया आयाम

राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) से प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म और उन्नत चिकित्सा सेवाओं को मिलेगा नया आयाम

रिपोर्ट प्रीति बालानी। संपादन नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स 

25 अगस्त 2025, 05:22 PM, जयपुर – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में आमजन को विश्व स्तरीय और किफायती चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2024-25 के बजट में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा को नए आयाम देने के लिए राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरयूएचएस) का उन्नयन कर दिल्ली एम्स की तर्ज पर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) की स्थापना की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में राज्य सरकार विधानसभा में ‘राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जयपुर विधेयक 2025’ पेश करेगी।

चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि रिम्स में सुपर-स्पेशियलिटी नैदानिक सेवाओं, उन्नत चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए अनुसंधान और रोगी देखभाल की सर्वोत्तम सुविधाएँ आमजन को उपलब्ध कराई जाएंगी। रिम्स एक स्वायत्त संस्थान और विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा, जहाँ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक मान्यता प्रदान की जाएगी।

रिम्स में उपलब्ध सुविधाएँ

चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि रिम्स में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, सीटीवीएस और ट्रांसप्लांट यूनिट जैसी सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। इसके अलावा पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, रूमेटोलॉजी, रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्लीप मेडिसिन और क्रिटिकल केयर जैसी नई सब-स्पेशियलिटी विभागों की भी स्थापना होगी।

संस्थान में क्वाटरनरी-स्तर के रेफरल अस्पताल सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा और संबद्ध विज्ञानों (आयुष प्रणालियों-आयुर्वेद और योग) में विशेष स्नातकोत्तर शिक्षण, राज्य के विशिष्ट स्वास्थ्य पहलुओं पर नवाचार अनुसंधान और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। सरकारी नीतियों और योजनाओं के पात्र मरीजों को मुफ्त उपचार मिलेगा, जिससे अन्य राजकीय अस्पतालों पर मरीजों का भार कम होगा और उन्हें विश्व स्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

प्रशासनिक ढांचा

राज्य के मुख्य सचिव रिम्स के अध्यक्ष होंगे और निदेशक प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किए जाएंगे। एक शासी निकाय का गठन किया जाएगा, जिसमें एम्स नई दिल्ली, चंडीगढ़ के पीजीआई और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। आरयूएचएस और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जयपुर को भी रिम्स में समाहित करने का प्रस्ताव है।

विश्व स्तरीय सुविधाओं के लिए निवेश

रिम्स के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय प्रस्तावित है। अन्य खर्चों के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकेगा। रिम्स में मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्र और फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट जैसे स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विधानसभा से रिम्स विधेयक पारित होने के बाद विभिन्न विषय विशेषज्ञों और निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान और आदान-प्रदान के लिए विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थानों के साथ अनुबंध किए जाएंगे। रिम्स की स्थापना से राजस्थान देश-विदेश में मेडिकल टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित होगा और आमजन को आधुनिक, किफायती और विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध होंगी।

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