राजस्थान आबकारी विभाग की वसूली पर रिपोर्ट: अप्रैल में रिकॉर्ड, जून में गिरावट, टारगेट से पिछड़ता विभाग
By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 18,2025
जयपुर: राजस्थान के आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत अप्रैल माह में शानदार प्रदर्शन के साथ की थी, लेकिन मई और जून में राजस्व वसूली की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। हालात ये हैं कि अब विभाग अपने वार्षिक टारगेट से काफी पीछे नजर आ रहा है। अप्रैल में जहां 18 जिलों ने 100 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य हासिल किया, वहीं जून तक आते-आते हालात पूरी तरह बदल गए।
अप्रैल में रिकॉर्ड, जून में ब्रेक
आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते के नेतृत्व में अप्रैल की शुरुआत बड़े स्तर पर अभियानों के साथ हुई, जिनके परिणाम भी सकारात्मक रहे। कई जिलों ने लक्ष्य से अधिक वसूली की। लेकिन मई और जून के आंकड़ों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
अप्रैल में मिली सफलता के बाद ऐसा माना जा रहा था कि विभाग 2025-26 के लिए तय किए गए 19,720 करोड़ रुपए के टारगेट को आसानी से पार कर लेगा, लेकिन जून के प्रदर्शन ने सभी अनुमानों को झुठला दिया।
जून में सिर्फ तीन जिले ही दिखा सके दम
जून महीने की रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में सिर्फ तीन जिले ही ऐसे रहे, जिन्होंने 100 प्रतिशत से ज्यादा वसूली की:
- डूंगरपुर: 139.74%
- जालोर: 103.36%
- सिरोही: 101.01%
इसके अलावा जयपुर सिटी मात्र 76.46% पर अटक गया और 24वें स्थान पर रहा। जयपुर ग्रामीण भी 77.84% के साथ 19वें स्थान पर रहा। धौलपुर सबसे फिसड्डी जिलों में शामिल रहा, जिसकी वसूली केवल 68.27% रही और यह 42वें स्थान पर रहा।
जून की गिरती वसूली: किस जिले ने कितना किया?
यहां देखें कुछ प्रमुख जिलों का अप्रैल और जून के वसूली प्रतिशत:
| जिला | अप्रैल (%) | जून (%) |
|---|---|---|
| डूंगरपुर | 134.57 | 139.74 |
| सिरोही | 128.40 | 101.01 |
| जालोर | 116.01 | 103.36 |
| जयपुर सिटी | 85.76 | 76.46 |
| जयपुर ग्रामीण | 98.19 | 77.84 |
| धौलपुर | 96.84 | 68.27 |
| प्रतापगढ़ | 152.64 | 97.07 |
| टोंक | 106.29 | 77.11 |
| अजमेर | 97.38 | 79.00 |
| बीकानेर | 91.23 | 74.26 |
कमजोर जिलों पर सख्त हुई कार्रवाई
अब जबकि विभाग का प्रदर्शन लगातार गिर रहा है, आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते लगातार बैठकों के माध्यम से कमजोर जिलों के अधिकारियों को तलब कर रहे हैं और उन्हें टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
बकाया वसूली बनी सबसे बड़ी चुनौती
एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कई जिलों में पुरानी बकाया वसूली पर कोई काम नहीं हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बकाया वसूली के आंकड़े शून्य पर बने हुए हैं। यदि बकाया वसूली को प्राथमिकता दी जाए तो विभाग की कुल आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
जुलाई-अगस्त की चिंता अभी से
अधिकारियों का कहना है कि जुलाई और अगस्त में ऑफ-सीजन की वजह से आंकड़े और गिर सकते हैं। ऐसे में यदि जल्द ही कोई नई रणनीति नहीं बनाई गई तो सालाना लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।