राजस्थानी भाषा और साहित्य की समृद्धि को वैश्विक पहचान दिलाना आवश्यक: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
बीकानेर | 10 जनवरी, 2026
| लोकेंद्र सिंह शेखावत
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति की संपन्नता पर जोर देते हुए कहा है कि यह प्रदेश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने आह्वान किया कि ‘मायड़ भाषा’ (मातृभाषा) के व्यापक प्रचार-प्रसार और इसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए पूरी गंभीरता के साथ सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
’जागती जोत’ के विशेषांकों का अवलोकन
शुक्रवार को बीकानेर ट्रेड फेयर एक्सपो परिसर के भ्रमण के दौरान अर्जुन राम मेघवाल ने राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की प्रतिष्ठित मुखपत्रिका ‘जागती जोत’ के हाल ही में प्रकाशित अंकों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने अकादमी द्वारा साहित्य संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
पत्रिका के इन नवीन अंकों में दो महत्वपूर्ण विशेषांक शामिल हैं:
- ‘राजस्थानी गद्य साहित्य री समालोचना’: यह अंक राजस्थानी गद्य की विकास यात्रा और उसकी समीक्षा पर केंद्रित है।
- ‘डॉ. नृसिंह राजपुरोहित विशेषांक’: यह अंक प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नृसिंह राजपुरोहित के योगदान को समर्पित है।
समृद्ध साहित्य परंपरा पर चर्चा
अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा के दौरान कहा कि राजस्थानी भाषा में अत्यंत उत्कृष्ट और उच्च कोटि के साहित्य का सृजन हुआ है, जो समाज को दिशा देने का सामर्थ्य रखता है। उन्होंने स्थानीय लेखकों और विद्वानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
आगामी कार्ययोजना
कार्यक्रम के दौरान अकादमी सचिव शरद केवलिया ने केंद्रीय मंत्री को अकादमी की वर्तमान गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। वहीं, ‘जागती जोत’ के संपादक मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने पत्रिका के आगामी अंकों की विषयवस्तु और प्रकाशन की तैयारी के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।
यह आयोजन राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता और सांस्कृतिक गौरव दिलाने की दिशा में जारी प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

