राजधानी की जीवनरेखा बीसलपुर बांध में शुरू हुई बंपर पानी की आवक, जल स्तर में आधा मीटर से अधिक की बढ़ोतरी
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 03,2025
(दिव्या तिवाड़ी| टोंक/जयपुर)
राजधानी जयपुर सहित अजमेर, टोंक, किशनगढ़, ब्यावर और दूदू जैसे क्षेत्रों की जल जीवनरेखा कहे जाने वाले बीसलपुर बांध से गुरुवार सुबह राहत भरी खबर आई है। मानसून की सक्रियता के साथ बांध में बंपर पानी की आवक शुरू हो गई है, जिससे जलस्तर में आधा मीटर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह पानी पिछले 24 घंटे में तेज बारिश और कैचमेंट एरिया में जलस्रोतों के ओवरफ्लो के चलते आया है।
त्रिवेणी पर 8 मीटर पानी ओवरफ्लो, गोवटा बांध भी छलका
बुधवार रात त्रिवेणी में बनास नदी का जल स्तर अचानक बढ़कर 8 मीटर तक पहुंच गया, जिससे बीसलपुर में जोरदार पानी की आवक शुरू हो गई। वहीं, भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ स्थित गोवटा बांध के ओवरफ्लो होने से उसकी अतिरिक्त जलधारा भी बीसलपुर में मिल रही है। इसके परिणामस्वरूप गुरुवार सुबह तक बांध का जल स्तर 313.17 मीटर आरएल तक पहुंच गया है।
कैचमेंट एरिया में तेज बारिश, लगातार बढ़ रहा है जलस्तर
बांध के कैचमेंट एरिया — चित्तौड़गढ़, मांडलगढ़, ऊपरमाल और आसपास के क्षेत्रों में बीते 24 घंटे में भारी बारिश हुई। बुधवार सुबह 6 बजे जल स्तर जहां 312.64 मीटर था, वहीं शाम तक यह 312.67 मीटर पहुंच गया। रातभर जारी जलप्रवाह के चलते गुरुवार सुबह तक यह जल स्तर 313.17 मीटर पर जा पहुंचा है।
वर्तमान स्टोरेज और क्षमता
बीसलपुर बांध में फिलहाल 23.188 टीएमसी पानी स्टोर हो चुका है, जबकि इसकी पूर्ण भराव क्षमता 315.50 मीटर आरएल है। यानी अभी बांध में करीब 2.33 मीटर जल भराव की गुंजाइश शेष है।
क्यों है बीसलपुर बांध अहम?
जयपुर, अजमेर, टोंक सहित कई बड़े शहरों और कस्बों की पेयजल आपूर्ति बीसलपुर बांध से होती है। यह बांध इन इलाकों के लाखों लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित होता है। हर साल मानसून में इस बांध की भराव स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहती हैं।
अब क्या स्थिति है?
गुरुवार सुबह त्रिवेणी पुलिया पर बनास नदी का गेज घटकर 4.30 मीटर रह गया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल जल आवक थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन ऊपर के क्षेत्रों में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो बीसलपुर अगले कुछ दिनों में और अधिक भर सकता है।
बीसलपुर बांध में हो रही बंपर पानी की आवक इस मानसून के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि इसी प्रकार बारिश बनी रही, तो जल संकट से जूझ रहे कई क्षेत्रों को बड़ी राहत मिल सकती है।

