जयपुर/नरेश गुनानी/राइजिंग राजस्थान के माध्यम से प्रदेश में निवेश के लिए पूरी तरह अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। राज्य सरकार अब हस्ताक्षरित सहमति पत्रों (एमओयू) को तेजी से धरातल पर उतारने के कार्य में जुटी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप आगामी 10 दिसंबर को आयोजित होने वाले ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ तक अधिकाधिक एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग सुनिश्चित की जाए।
लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण पर जोर
राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए एमओयू की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित प्रकरणों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निवेश परियोजनाओं से संबंधित आवश्यक प्रस्ताव एवं फाइलें बिना किसी विलंब के प्रस्तुत की जाएं। इसके साथ ही संबंधित जिला कलक्टरों से निरंतर समन्वय बनाकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही प्रशासनिक व तकनीकी बाधाओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से ऊर्जा एवं राजस्व विभाग को अपनी प्रक्रियाओं में अपेक्षित प्रगति लाने को कहा।
भूमि आवंटन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता
औद्योगिक परियोजनाओं की गति बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव ने भूमि संबंधी प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भूमि की पहचान और आवंटन से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान निकाला जाए, जिससे निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो और परियोजनाएं तेजी से मूर्त रूप ले सकें।
35 लाख करोड़ के प्रस्ताव प्रक्रियाधीन, 8 लाख करोड़ से अधिक हुए ग्राउंड
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) शिखर अग्रवाल ने विभागवार प्रगति का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राइजिंग राजस्थान के तहत 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव वर्तमान में विभिन्न चरणों में हैं। इनमें से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग सफलता पूर्वक पूरी की जा चुकी है।
अग्रवाल ने निर्देश दिए कि जिन प्रकरणों में स्वीकृति दी जानी है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित न रखते हुए शीघ्र अनुमोदित किया जाए। वहीं, जिन मामलों में स्वीकृति संभव नहीं है, उन पर भी तत्काल निर्णय लेकर प्रकरण समाप्त किए जाएं।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा निर्धारित लक्ष्यों और उनके विरुद्ध अर्जित वास्तविक प्रगति का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी निवेश प्रस्तावों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि तय समय-सीमा में लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
इस उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि प्रदेश के सभी संबंधित जिला कलक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।