सुनील शर्मा
जयपुर | 12 मई, 2026
राजस्थान में निवेश के माहौल को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ के तहत हुए समझौतों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने सक्रियता बढ़ा दी है। मंगलवार को शासन सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विभागवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
समयबद्ध निस्तारण और पारदर्शिता पर जोर
मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान निवेश परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति का विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निवेशकों के लंबित प्रकरणों का निराकरण एक निश्चित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा, “प्रदेश में निवेश का वातावरण सुगम, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बहु-विभागीय समन्वय की आवश्यकता वाले मामलों में विभाग आपसी सहयोग से समाधान निकालें।”
इन प्रमुख कार्यों में तेजी लाने के निर्देश:
बैठक में मुख्य सचिव ने विशेष रूप से निम्नलिखित प्रक्रियाओं को गति देने के निर्देश दिए:
- भूमि रूपांतरण एवं पट्टा आवंटन: जमीन से संबंधित लंबित फाइलों का शीघ्र निस्तारण।
- अनुमोदन एवं एनओसी: लेआउट अप्रूवल और विभिन्न विभागों से मिलने वाली एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) में देरी न की जाए।
- नियमित संवाद: निवेशकों को उनके प्रकरणों की अद्यतन स्थिति (Status) से समय-समय पर अवगत कराया जाए।
आर्थिक विकास और रोजगार का विजन
समीक्षा के दौरान यह रेखांकित किया गया कि राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान हस्ताक्षरित एमओयू प्रदेश के आर्थिक विकास की आधारशिला हैं। इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल राजस्थान की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों को गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा होंगे।
33 निवेश प्रस्तावों की गहन समीक्षा
बैठक में कुल 33 बड़े निवेश प्रस्तावों की प्रगति पर चर्चा की गई। ये प्रस्ताव विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं, जिनमें शामिल हैं:
- पर्यटन और शिक्षा
- ऊर्जा और उद्योग
- स्वास्थ्य एवं चिकित्सा
- नगर विकास, आवासन और स्वायत्त शासन
- खेल एवं युवा मामले
कलेक्टर्स के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग विभाग), शिखर अग्रवाल ने बैठक में बताया कि अधिकांश निवेश प्रस्तावों में सकारात्मक प्रगति देखी गई है। लंबित प्रकरणों को त्वरित सुलझाने के लिए उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टर- जैसलमेर, बांसवाड़ा, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ के साथ-साथ जोधपुर और बीकानेर विकास प्राधिकरण के आयुक्तों से संवाद किया और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
इस उच्च स्तरीय बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने विभागों से संबंधित एमओयू की स्थिति साझा की।