रणथंभौर के 31 बाघों को इलाके की तलाश, त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर खतरे की आहट | अगले तीन महीने सतर्क रहें! सवाई माधोपुर |04 जून 2025/ न्यूज़ रिपोर्ट सत्यनारायण Edited By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
सवाई माधोपुर:राजस्थान के सबसे बड़े और चर्चित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघों की बढ़ती संख्या वन विभाग के लिए चुनौती बनती जा रही है। एक ओर यह संरक्षण की सफलता है, वहीं दूसरी ओर युवा हो रहे बाघ शावकों की टेरिटरी तलाश चिंता का बड़ा कारण बन चुकी है।
🐅 रणथंभौर में अब 80 बाघ: 31 शावक जवानी की ओर
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 80 बाघ (24 नर, 25 मादा और 31 शावक) मौजूद हैं। इन 31 शावकों में अधिकांश अब युवा अवस्था की ओर बढ़ रहे हैं और अपने-अपने इलाके की तलाश में हैं। बाघों की यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन अब इसका असर इंसानी इलाकों और पर्यटक मार्गों पर भी दिखने लगा है।
📍 939 वर्ग किमी का इलाका, लेकिन जगह कम
रणथंभौर का कुल क्षेत्रफल 1068 वर्ग किमी है, जिसमें से 128 वर्ग किमी क्षेत्र पाली घाट-चंबल इलाके में आता है, यानी बाघों के लिए कुल 939.14 वर्ग किमी ही उपलब्ध है। इसमें भी मात्र 600 वर्ग किमी कोर एरिया है, जबकि बाकी हिस्सा बफर जोन कहलाता है।
तेजी से बढ़ती बाघों की संख्या के चलते अब यह इलाका संघर्ष का केंद्र बनता जा रहा है। बाघों के स्वभाव के अनुसार वे अपनी अलग टेरिटरी बनाते हैं और बाहरी बाघों को बर्दाश्त नहीं करते, जिससे टेरिटोरियल फाइट्स बढ़ने की आशंका है।
⚠️ त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर खतरा
वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि अगले 2-3 महीनों तक त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहद सावधानी बरतनी होगी। क्योंकि युवा बाघों की आवाजाही इस क्षेत्र में देखी जा रही है।
विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि सुबह-शाम के समय ट्रैकिंग या अकेले यात्रा से बचें।
😟 वन विभाग की सीमित तैयारी, बढ़ता खतरा
युवा बाघों को बार-बार ट्रैंकुलाइज कर जंगल में छोड़ना एक तात्कालिक समाधान है, लेकिन दीर्घकालिक नीति का अभाव साफ नजर आता है।
यदि समय रहते सरकार ने नई सैटेलाइट बाघ रेंज, कोर एरिया का विस्तार या बाघ स्थानांतरण योजना लागू नहीं की, तो:
- इंसान-बाघ संघर्ष बढ़ सकता है
- पर्यटन पर असर पड़ेगा
- बाघों के बीच घातक लड़ाइयाँ होंगी
- बाघों का अप्राकृतिक स्थानों में भटकाव होगा
🛑 अब चाहिए ठोस कदम
वन्यजीव विशेषज्ञों की मांग है कि सरकार को तत्काल:
- नई टाइगर रेंज विकसित करनी चाहिए
- बफर ज़ोन को सशक्त बनाना होगा
- बाघों के स्थानांतरण की नीति लागू करनी चाहिए
- स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों को जागरूक किया जाए

