रघुनाथ शाह मंदिर में श्रद्धाभाव से मनाया गया दिव्य श्री राम–जानकी विवाह उत्सव
विशेष संयोग में हुई पूजा-अर्चना, हजारों भक्तों ने लिए आशीर्वाद
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर, अजमेर।
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर इस वर्ष श्री राम–जानकी विवाह उत्सव विशेष संयोग के साथ मनाया गया। तीर्थनगरी पुष्कर में मुख्य आयोजन हनुमान गली स्थित प्राचीन रघुनाथ शाह मंदिर में हुआ, जहां भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और दिव्यता के बीच राम–सीता विवाह उत्सव का आनंद लिया।
विशेष पूजा-अर्चना और भव्य श्रृंगार
मंदिर के पुजारी पंडित कैलाशनाथ दाधीच ने बताया कि मंगलवार को आयोजित समारोह में दोपहर 12 बजे भगवान श्री राम और माता जानकी की विशेष पूजा एवं आरती की गई।
इस दौरान—
- पंचामृत एवं तीर्थ जल से दिव्य अभिषेक,
- मंत्रोच्चारण के साथ वैदिक पूजन,
- नवीन वस्त्र धारण कराए गए,
- सुगंधित पुष्पों से श्रृंगार,
- और 56 भोग का विशेष निवार्ण किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि पर भगवान श्री राम और माता जानकी का दिव्य विवाह हुआ था, जिसे वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और पुराणों में विस्तार से वर्णित किया गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन राम–जानकी विवाह दर्शन करने से सुख, समृद्धि, जीवन में मंगल कार्यों की सिद्धि और शांति प्राप्त होती है।
भक्तों ने राम–सीता विवाह के साक्षी बनकर प्राप्त किया पुण्य
पूजा-अर्चना के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। मंदिर परिसर पूरे दिन भजन-कीर्तन, जयकारों और धार्मिक उल्लास से गूंजता रहा। राम–सीता विवाह की झांकी और सजावट ने वातावरण को पूर्णतः पावन बना दिया।
जनप्रतिनिधि और गणमान्य रहे उपस्थित
विवाह उत्सव में अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नगरवासी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से—
- भाजपा देहात जिलाध्यक्ष जीतमल प्रजापत
- भाजपा मंडल अध्यक्ष भुवनेश पाठक
- भाजपा जिला प्रवक्ता अरुण वैष्णव
- दामोदर मुखिया
- हाई सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल चंद्रवीर सिंह चौहान
- लक्ष्मी देवी पाराशर, सर्वेश्वर शास्त्री, शिव प्रकाश वैष्णव, देवांश दामू पाराशर,
- चंद्रशेखर गौड़, राहुल पाराशर, इंदर सिंह पंवार, विकास मुखिया, प्रभुलाल शास्त्री,
- नीरज मिश्रा, ठाकुर मुलानी, कुलदीप दाधीच, चितरंजन कान्हा राजोरिया
—सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया।
रघुनाथ शाह मंदिर में आयोजित यह भव्य श्री राम-जानकी विवाह उत्सव न केवल सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा का प्रतीक रहा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर एक अविस्मरणीय अवसर बना।