युवा संगम चरण 6: गुजरात के छात्रों ने ओडिशा की संस्कृति और विकास को जाना, राज्यपाल से किया संवाद

भुवनेश्वर  |  आसिम अमिताव बिस्वाल 

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत युवा संगम के छठे चरण में गुजरात के छात्र प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा के सांस्कृतिक, शैक्षिक और औद्योगिक परिदृश्य को बेहद करीब से देखा। २४ मई २०२६ को ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भमपति ने राजभवन में इन युवा छात्रों से मुलाकात की और उनके साथ एक सार्थक संवाद सत्र आयोजित किया।

राष्ट्रीय एकता में युवाओं की भूमिका पर जोर

छात्रों के साथ बातचीत करते हुए राज्यपाल ने राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक समझ को गहरा करने में युवाओं की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आदान-प्रदान कार्यक्रमों से राष्ट्रीय एकता की भावना सुदृढ़ होती है। इस सत्र ने छात्रों को नेतृत्व क्षमता, नागरिक जिम्मेदारियों और विविधता में एकता को बढ़ावा देने के प्रति प्रेरित किया।

आईआईएम अहमदाबाद और एनआईटी राउरकेला की अनूठी पहल

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) अहमदाबाद के नेतृत्व में गुजरात का यह छात्र दल २२ मई २०२६ को ओडिशा पहुंचा था। राज्य में इस शैक्षिक और सांस्कृतिक दौरे की मेजबानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) राउरकेला ने की, जहां २५ मई को छात्रों का भव्य स्वागत किया गया। यहीं से छात्रों के राज्यव्यापी शिक्षण सफर की शुरुआत हुई।

​यात्रा की मुख्य कड़ियां: संस्कृति से लेकर आधुनिक बुनियादी ढांचे तक

​छात्रों ने अपने इस दौरे में ओडिशा के गौरवशाली इतिहास और भविष्य की तकनीकी प्रगति दोनों का अनुभव लिया:

    • आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर: दल ने विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर और माँ समलेश्वरी मंदिर के दर्शन किए। इसके अलावा, छात्रों ने स्थानीय कारीगरों से मिलकर ओडिशा की जीवंत वस्त्र परंपराओं को समझा और मुंडा जनजातीय समुदाय के साथ पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया।
    • भाषाई विविधता: केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में छात्रों ने हिस्सा लिया, जहां भारत की भाषाई समृद्धता और आपसी समझ पर चर्चा की गई।
    • औद्योगिक और तकनीकी प्रगति: युवाओं ने एनआईटी राउरकेला की एफबीटीबीआई (FBTBI) प्रयोगशाला, राउरकेला इस्पात संयंत्र, हीराकुड बांध और बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम का दौरा किया। इससे उन्हें ओडिशा के नवाचार (इन्नोवेशन), इंजीनियरिंग कौशल और खेल बुनियादी ढांचे को समझने का मौका मिला।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश: सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए छात्रों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पौधरोपण किया और जैविक खेती व पर्यावरण संरक्षण के आधुनिक तौर-तरीकों को सीखा।

 

​३० मई २०२६ को एक विशेष समापन समारोह के साथ इस यात्रा का आधिकारिक तौर पर समापन हुआ। यह दौरा गुजरात और ओडिशा के युवाओं के बीच सीखने, सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत करने के मोर्चे पर बेहद सफल साबित हुआ।

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