युवाओं की अनूठी मिसाल: राजस्थान का पहला हरित गांव बनने की राह पर रातल्या, मोक्षधाम को बना रहे हैं नंदनवन

योगेश शर्मा 

– जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे पर स्थित गांव के युवाओं ने लिया संकल्प, ‘मोक्षधाम’ में प्रतिदिन किया जा रहा है पौधारोपण

– समाजसेवी कुम्भ सिंह चम्वात के सहयोग से रोपे गए औषधीय और छायादार पौधे, पर्यावरण संरक्षण की ली शपथ

जयपुर।

बढ़ते तापमान, भीषण गर्मी और पर्यावरण असंतुलन के दौर में जहां एक ओर पेड़-पौधों की कटाई चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर जयपुर ग्रामीण क्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे पर स्थित रातल्या गांव के युवाओं ने एक ऐसी अनूठी जिद पकड़ी है, जिसने इस गांव को राजस्थान का पहला संभावित ‘हरित गांव’ (Green Village) बनाने की दिशा में अग्रसर कर दिया है।

​गांव के सजग युवाओं ने किसी पार्क या आम रास्ते को नहीं, बल्कि दो बीघा क्षेत्र में फैले ‘मोक्षधाम’ (शमशान घाट) को हरा-भरा और सुंदर बनाने का बीड़ा उठाया है। युवाओं की इस सकारात्मक होड़ के चलते अब रातल्या का मोक्षधाम जल्द ही एक घने नंदनवन के रूप में नजर आएगा।

प्रतिदिन पौधारोपण: केवल संकल्प नहीं, धरातल पर काम

​ग्रामीणों के अनुसार, आमतौर पर मोक्षधाम को केवल अंतिम संस्कार और वैराग्य के स्थान के रूप में देखा जाता है, लेकिन रातल्या के युवाओं ने इस रूढ़िवादी सोच को बदला है। युवाओं का मानना है कि यह स्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति, पवित्रता और अच्छे संस्कारों का प्रतीक बनना चाहिए। इसी विज़न के साथ यहां ‘प्रतिदिन पौधारोपण अभियान’ की शुरुआत की गई है।

​अभियान के तहत रविवार को समाजसेवी कुम्भ सिंह चम्वात के विशेष सहयोग से मोक्षधाम परिसर में सघन पौधारोपण किया गया। इस दौरान परिसर में मौलश्री, कदम्ब, चीकू, और नीम जैसे ११ (ग्यारह) अत्यंत उपयोगी, छायादार और औषधीय पौधे रोपे गए। इसके बाद उपस्थित सभी युवाओं और ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली।

जब तक पूरा परिसर हरा-भरा नहीं होगा, तब तक नहीं रुकेंगे कदम

​स्थानीय निवासी और इस अभियान के सूत्रधार दिनेश बागड़ा और कृष्ण बागड़ा ने दृढ़ संकल्प जताते हुए कहा:

​”यह अभियान कोई एक या दो दिन का महज एक औपचारिकता मात्र कार्यक्रम नहीं है। यह तब तक निरंतर जारी रहेगा, जब तक कि दो बीघा में फैला पूरा मोक्षधाम घने पेड़ों और हरियाली से पूरी तरह आच्छादित (कवर) नहीं हो जाता। हमारा लक्ष्य इस स्थान को पूरी तरह छायादार, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।”

 

पौधों को गोद ले रहे युवा: सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड और पानी की जिम्मेदारी

​इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि युवा केवल पौधा लगाकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री नहीं कर रहे हैं। पौधों की सुरक्षा और उनके जीवित रहने की दर (Survival Rate) को शत-प्रतिशत बनाए रखने के लिए युवाओं ने आपस में जिम्मेदारियां बांटी हैं।

  • ​किसी युवा ने पौधों में नियमित रूप से पानी देने का जिम्मा संभाला है।
  • ​कुछ युवाओं ने आवारा पशुओं से सुरक्षा के लिए अपने स्तर पर ट्री-गार्ड लगाने की व्यवस्था की है।

​ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में जिस तरह से पारा ५० डिग्री के पास पहुंच रहा है और हरियाली घट रही है, उसे देखते हुए हर गांव और हर व्यक्ति को रातल्या के इस मॉडल को अपनाना चाहिए।

“पेड़ों के बिना अधूरा है इंसानी जीवन”

​कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवी महेश बागड़ा ने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन पेड़ों के बिना अधूरा है। पेड़ हमें फल, फूल, लकड़ी, औषधियां और सबसे महत्वपूर्ण ‘प्राणवायु’ (शुद्ध ऑक्सीजन) देते हैं। यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य सौंपना है, तो केवल बातें करने से काम नहीं चलेगा, हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेते हुए कम से कम एक पौधा जरूर लगाना होगा और उसे पेड़ बनने तक पालना होगा।

इस गरिमामयी अवसर पर ये रहे मौजूद:

इस प्रेरणादायक अभियान के दौरान गांव के वरिष्ठ जनों सहित युवा शक्ति बड़ी संख्या में मौजूद रही, जिनमें मुख्य रूप से गजेंद्र मेहता, रवि बाड़ीवाल, जितेंद्र बाबड़ी, राजुलाल अचरावाला सहित दर्जनों प्रबुद्ध ग्रामीण और पर्यावरण प्रेमी शामिल थे।

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