जयपुर, 10 जुलाई / नरेश गुनानी/राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बने यमुना जल समझौते से प्रदेश की पेयजल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी और जल संसाधनों के क्षेत्र में दीर्घकालिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। यह समझौता राजस्थान के विकास की दृष्टि से गर्व का विषय है। मुख्य सचिव ने इसके लिए विभागीय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की, साथ ही परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में यमुना जल हस्तांतरण परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) पर आयोजित प्रथम समीक्षा बैठक में यह बात कही। बैठक में परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से डीपीआर के विभिन्न तकनीकी एवं वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में सामने आए मुख्य बिंदु और परियोजना की प्रगति इस प्रकार है:
1. हथिनीकुंड से चूरू तक पहुंचेगा पानी
मुख्य सचिव ने परियोजना के अंतर्गत हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हिस्से के यमुना जल को भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से चूरू के हांसियावास तक पहुंचाने की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने ताजेवाला हेडवर्क्स के स्थान पर विकसित हथिनीकुंड बैराज से जल हस्तांतरण व्यवस्था, पश्चिमी यमुना नहर, पाइपलाइन प्रणाली तथा प्रस्तावित 386 एमसीएम क्षमता के स्टोरेज रिजर्वायर सहित डीपीआर के प्रमुख अवयवों की विस्तार से जानकारी ली।
2. परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- 295 किमी लंबी पाइपलाइन: परियोजना के तहत लगभग 295 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली विकसित की जाएगी।
- विशाल जलाशय: पानी को स्टोर करने के लिए 386 एमसीएम क्षमता का एक विशाल जलाशय (स्टोरेज रिजर्वायर) बनाया जाएगा।
- आधुनिक पम्पिंग सिस्टम: सुरक्षित और व्यवस्थित पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक पम्पिंग एवं जल परिवहन प्रणाली तैयार होगी।
- मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इतनी बड़ी जल संरचनाओं और रिजर्वायर के निर्माण में उत्कृष्ट इंजीनियरिंग, गुणवत्तापूर्ण निर्माण तथा दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए।
3. बांधों के पूरा होने से मिलेगा 201.05 एमसीएम पानी
समीक्षा के दौरान रेणुकाजी, लखवार एवं किशाऊ बांधों की प्रगति, राजस्थान के जल हिस्से, लागत भागीदारी तथा भविष्य में उपलब्ध होने वाले अतिरिक्त जल के उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि इन बांधों के पूर्ण होने के बाद राजस्थान को 201.05 एमसीएम जल वर्ष पर्यन्त उपलब्ध होगा, जिससे प्रदेश के दीर्घकालिक जल संसाधन और अधिक मजबूत होंगे।
4. 34,102 करोड़ रुपये की डीपीआर और वित्तीय मॉडल
- बैठक में बताया गया कि 34,102 करोड़ रूपये की संयुक्त डीपीआर वर्तमान में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के परीक्षणाधीन है। मुख्य सचिव ने इसके शीघ्र अनुमोदन के लिए आवश्यक समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
- परियोजना के वित्तपोषण (फंडिंग) के लिए विश्व बैंक सहित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं, बैंकिंग कंसोर्टियम तथा अन्य उपयुक्त वित्तीय मॉडलों के विकल्पों पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
भविष्य का रोडमैप और आवश्यक स्वीकृतियां
मुख्य सचिव ने परियोजना की कार्ययोजना, चरणबद्ध टाइमलाइन, व्यय प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, वन एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों, स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के गठन तथा आगामी कार्यवाहियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने भूमि अर्जन, पम्प हाउस, ग्रिड सब-स्टेशन तथा अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचों से जुड़े कार्यों को निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में उपस्थिति:
इस अवसर पर जल संसाधन विभाग और राज्य जल संसाधन आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, मुख्य अभियंता भुवन भास्कर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।