जयपुर। (योगेश शर्मा) समर्थ, संपन्न और शक्तिशाली भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगामी 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर में भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। अखिल विश्व गायत्री परिवार के आह्वान पर आयोजित ‘गृहे-गृहे यज्ञ अभियान’ के अंतर्गत इस वर्ष एक नया कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है, जहाँ देशभर में एक ही समय पर 24 लाख स्थानों पर हवन कुंडों में आहुतियां दी जाएंगी।
राजस्थान में इस अभियान को लेकर भारी उत्साह है। प्रदेश भर में एक लाख घरों में गायत्री महायज्ञ संपन्न होगा, जबकि गुलाबी नगरी जयपुर के 11 हजार घरों में मंत्रोच्चार के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।
तैयारियां अंतिम चरण में: घर-घर पहुँच रही ‘यज्ञ किट’
अभियान की सफलता के लिए जयपुर के किरण पथ (मानसरोवर) स्थित श्री वेदमाता गायत्री वेदना निवारण केन्द्र और गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी सहित शहर के दर्जनों केंद्रों पर युद्ध स्तर पर तैयारियां जारी हैं। बुधवार को कार्यकर्ताओं ने विशेष यज्ञ सामग्री किट तैयार कर श्रद्धालुओं के घर-घर पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया है।
यज्ञ का गणित और सामग्री:
जयपुर में होने वाले 11 हजार यज्ञों के लिए व्यापक स्तर पर सामग्री जुटाई गई है:
- हवन सामग्री: 1100 किलोग्राम
- शुद्ध घी: 2200 किलोग्राम
- कपूर: 110 किलोग्राम
पर्यावरण संरक्षण और सेवा का संकल्प
गायत्री परिवार राजस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र निर्माण और वैश्विक सुख-शांति के लिए एक जन-आंदोलन है।
इस बार यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद एक नई परंपरा का निर्वहन किया जाएगा:
- तरु प्रसाद: यज्ञ के बाद श्रद्धालुओं को पौधों का वितरण किया जाएगा।
- सामाजिक जागरूकता: रक्तदान, अंगदान और नशा मुक्ति के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।
- ज्ञान का दान: महात्मा बुद्ध के जीवन दर्शन पर आधारित पुस्तिकाएं निःशुल्क वितरित की जाएंगी।
डिजिटल क्रांति: ऑनलाइन विधि से जुड़ेंगे श्रद्धालु
जयपुर उप जोन समन्वयक सुशील कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि जो परिवार किन्हीं कारणों से पंडितों से संपर्क नहीं कर पाए हैं, वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकेंगे। यूट्यूब, सोशल मीडिया और मोबाइल एप के जरिए यज्ञ की सरल विधि सिखाई जाएगी।
समय का विशेष ध्यान:
यज्ञ का मुख्य कार्यक्रम सुबह 7:30 बजे प्रारंभ होगा। सभी प्रतिभागियों से सुबह 7:15 बजे तक स्नान-ध्यान कर तैयार रहने का आग्रह किया गया है।
कोरोना काल की पहल, अब बना विश्वव्यापी मिशन
उल्लेखनीय है कि ‘गृहे-गृहे यज्ञ’ की यह अभिनव परंपरा कोरोना काल के दौरान घर-घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए शुरू की गई थी। अब यह एक डिजिटल और वैश्विक मिशन बन चुका है। समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यज्ञ की दक्षिणा का उपयोग पौधारोपण, पक्षियों के लिए परिंडे लगाने, जरूरतमंदों को भोजन कराने या निर्धन बच्चों को शिक्षा सामग्री भेंट करने जैसे पुण्य कार्यों में करें।