— पशुपालन मंत्री ने विभागीय कार्मिकों को तत्पर, सक्रिय और संवेदनशील होकर कार्य करने के निर्देश
नरेश गुनानी
जयपुर, 29 नवंबर।
प्रदेश में सर्दी ने दस्तक दे दी है और दिन व रात्रि के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बदलते मौसम का प्रतिकूल असर पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादन क्षमता एवं रोगों की संवेदनशीलता पर पड़ सकता है। इसी कारण पशुपालन विभाग ने रोग रोकथाम एवं सुरक्षात्मक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेशभर के सभी जिलों को एडवायजरी जारी कर दी है।
पशुपालन मंत्री ने शीत ऋतु में होने वाले पशु रोगों से बचाव के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्पर, सक्रिय और संवेदनशील रहकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल चिकित्सा दलों का समुचित उपयोग कर रोग निदान और नियंत्रण में लगने वाला समय न्यूनतम रखा जाए। साथ ही वैक्सीन एवं तापसंवेदी औषधियों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन संधारण की विशेष निगरानी की जाए।
टीकाकरण, उपचार और औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित
मंत्री ने निर्देश दिए कि पशु चिकित्सा संस्थानों में संभावित रोगों की रोकथाम व उपचार हेतु आवश्यक टीकों और औषधियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिला स्तर पर भी आपातकालीन स्थिति के लिए इनकी पर्याप्त मात्रा आरक्षित रखी जाए।
उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में संक्रामक रोगों की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए एंडेमिक क्षेत्रों में समयबद्ध तरीके से टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है। पशुपालकों को भी रोगों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाए।
गौशालाओं में संधारित पशुधन का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नजदीकी पशु चिकित्सक से कराने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि गौशाला प्रबंधन के सहयोग से टीकाकरण, डीवार्मिंग और उपचार जैसे कार्य सुनिश्चित किए जाएं।
ऊंटों में श्वास संबंधी बीमारियों पर विशेष निगरानी
मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर आदि जिलों में शीत ऋतु के दौरान ऊंटों में श्वसन संबंधी रोगों का प्रकोप बढ़ा है। इसलिए उष्ट्र-सम्पदा के संरक्षण के लिए विशेष ध्यान देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पशुओं के आहार और आवास पर विशेष ध्यान
विभाग ने ठंड से बचाव के लिए पशुओं के आवास एवं भोजन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं—
- पशुओं को ठंडी हवा, नमी और वर्षा से बचाकर सूखे व हवादार स्थान पर रखा जाए।
- बिछावन में सूखा भूसा, गुन्नी बैग या अन्य सूखी सामग्री का उपयोग किया जाए।
- पॉल्ट्री शेड्स में पर्दे लगाए जाएं और आवश्यकता अनुसार हीटर का उपयोग किया जाए।
मंत्री ने कहा कि शीतलहर के दौरान पशुओं की ऊर्जा आवश्यकता बढ़ जाती है, इसलिए उनके आहार में गुड़, अनाज, खल्ली और अन्य ऊर्जा स्रोतों की मात्रा बढ़ाई जाए। साथ ही उन्हें गुनगुना पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि जल ग्रहण पर्याप्त बना रहे।
पशुपालकों से अपील
मंत्री ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें और विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली एडवायजरी का पालन करें। आवश्यकता पड़ने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय या उपकेंद्र से संपर्क करें।

