मोहर्रम शरीफ के लिए अन्दरकोट में 13 दिवसीय कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी, पारंपरिक हाईदौस और मुशायरे होंगे आकर्षण का केंद्र
हताई चौक से शुरू होगा मर्सिया ख्वानी का सिलसिला, प्रशासनिक व्यवस्था भी रहेगी चाक-चौबंद
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 26,2025
(हरिप्रसाद शर्मा, अजमेर)
अजमेर के अन्दरकोट क्षेत्र में मोहर्रम शरीफ के पावन अवसर पर इस बार भी पारंपरिक और धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला शुरू होने जा रही है। दी सोसाइटी पंचायत अन्दरकोटियान की ओर से आयोजित इन कार्यक्रमों को लेकर पंचायत कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पंचायत सदर शामीर खान ने की। इस बैठक में मोहर्रम का चांद दिखते ही शुरू होने वाले 13 दिवसीय कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तय की गई।
मर्सिया ख्वानी से होगी शुरुआत
जैसे ही मोहर्रम का चांद नजर आएगा, उसी रात हताई चौक में मर्सिया ख्वानी और शोहदा-ए-करबला का जिक्र प्रारंभ होगा। यह आयोजन प्रसिद्ध मर्सिया ख्वान मुमताज मोहम्मद उर्फ अय्या भाई पॉटी द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन स्थल को विशेष रोशनी और सजावट से संवारा जाएगा, जिससे माहौल में श्रद्धा और संजीदगी का समावेश हो।
अलम और लंगरखाना जुलूस का आयोजन
मोहर्रम की सातवीं तारीख को जोहर की नमाज के पश्चात हताई चौक से तोप दागने की परंपरा निभाई जाएगी, जिसके साथ झांझ बजाते हुए अलम को लंगरखाना की ओर रवाना किया जाएगा। वहां से दोपहर 3 बजे दरगाह शरीफ से जुलूस शुरू होकर त्रिपोलिया गेट होते हुए शाम 7 बजे हताई चौक इमामबाड़ा पर समाप्त होगा।
मुशायरे में होगा बज्मे सलाम
इसी दिन रात 10 बजे हताई चौक पर बज्मे सलाम (मुशायरा) का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय और बाहरी शायर शिरकत करेंगे। यह कार्यक्रम करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि देने और इस्लामी संस्कृति की साहित्यिक परंपरा को जीवंत करने का एक माध्यम होगा।
ढोले शरीफ और परंपरागत हाईदौस की तैयारी
चांद की नौवीं तारीख को दोपहर 2 बजे जामा-ए-अलतमश में ढोले शरीफ बनाए जाएंगे। इशा की नमाज के पश्चात इनकी सवारी निकलेगी, जिन्हें ढाई दिन का झोपड़ा स्थित सीढ़ियों पर सजाया जाएगा। इसके बाद 100 पारंपरिक तलवारों के साथ हाईदौस का आयोजन होगा। यह युद्धक कला का प्रदर्शन 20-30 मिनट तक चलेगा। इसके लिए पंचायत द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए विशेष बैठक व्यवस्था की गई है। साथ ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जेएलएन अस्पताल की मेडिकल टीम भी मौके पर तैनात रहेगी।
योमे आशुरा को होगा मुख्य हाईदौस जुलूस
मोहर्रम की दसवीं तारीख, यानी योमे आशुरा के दिन दोपहर 2 बजे जोहर की नमाज के बाद हताई चौक से मुख्य हाईदौस जुलूस तलवारों के साथ निकाला जाएगा। यह जुलूस त्रिपोलिया गेट, कातन बाव, बाड़ बाव, तलाब से होता हुआ आमा बावड़ी पहुंचेगा। वहीं पर असर की नमाज के समय हाईदौस का समापन किया जाएगा। इस जुलूस के पीछे-पीछे ढोले शरीफ की सवारी चलेगी, जिसे मर्सियों की गूंज के बीच आमा बावड़ी में सेहराब (पानी पिलाने की रस्म) किया जाएगा।
धार्मिक आस्था, परंपरा और व्यवस्था का समन्वय
पंचायत सचिव शफीक अहमद और मोहर्रम कन्वीनर एडवोकेट अब्दुल शाहिद ने बताया कि इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य न सिर्फ करबला के शहीदों की याद में मातम मनाना है, बल्कि मुस्लिम समाज की धार्मिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहयोग की भावना को मजबूत करना भी है। पंचायत द्वारा सभी कार्यक्रमों की अनुमतियों और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
संभावित भीड़ और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन सतर्क
मोहर्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को सुरक्षा, साफ-सफाई, यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हों।

