मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय का 33वां दीक्षांत समारोह
विद्यार्थी सत्य, धर्म और मानवता के मार्ग पर चलें, शिक्षा से ही गरीबी का अंत संभव – राज्यपाल
| नरेश गुनानी
उदयपुर/जयपुर, 21 दिसंबर 2025।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा ही समाज में व्याप्त गरीबी और असमानता को समाप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जीवन में सदैव सत्य के मार्ग पर चलें, धर्म का पालन करें तथा मानवता की सेवा को अपना लक्ष्य बनाएं।
राज्यपाल रविवार को उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में गुरु और शिष्य के बीच पारिवारिक संबंध होते थे, जिससे विद्यार्थियों का सतत मूल्यांकन संभव हो पाता था। आज भी शिक्षा में मूल्यों और संस्कारों का समावेश आवश्यक है।
उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब किसी परिवार का एक सदस्य शिक्षा प्राप्त कर रोजगार हासिल करता है, तो उसकी पूरी पीढ़ी का भविष्य संवर जाता है। वंचित वर्ग को शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, क्योंकि शिक्षा से ही गरीबी का स्थायी समाधान संभव है।
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 255 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि तथा 109 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
राज्यपाल ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि शौर्य, मर्यादा और उत्कृष्ट संस्कारों की प्रतीक रही है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की शारीरिक, मानसिक और नैतिक क्षमता का सर्वांगीण विकास करना होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में स्थान बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने दीक्षांत संबोधन में कहा कि यह समारोह केवल डिग्री वितरण का अवसर नहीं है, बल्कि विद्यार्थी के निर्माण में शिक्षक, अभिभावक और संस्थान के सामूहिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा से ही व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है और मानव सभ्यता के अस्तित्व तक गुरु का सम्मान बना रहेगा। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक स्वर्ण पदक और पीएचडी उपाधियां बालिकाओं को प्राप्त हुईं, जो समाज के सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा मजबूत नीतिगत निर्णय लिए जा रहे हैं और संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में मात्रात्मक विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक सुधार को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
सार्वजनिक निर्माण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री मंजू बाघमार ने कहा कि सच्ची शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि समय के साथ अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करना ही वास्तविक शिक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत युवा शक्ति का देश है और युवाओं की ऊर्जा ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु बी.पी. सारस्वत ने की। उन्होंने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और प्रगति प्रतिवेदन की जानकारी दी।