मेड़ता मण्डी में कुदरत का कहर: मूसलाधार बारिश से ‘सोना’ बना ‘रांगा’, करोड़ों के नुकसान से किसान-व्यापारी बेहाल

रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर

जयपुर/मेड़ता सिटी:

मेड़ता मण्डी में सोमवार को प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि देखते ही देखते किसानों की मेहनत और व्यापारियों की पूंजी पानी में बह गई। करीब डेढ़ घण्टे तक हुई मूसलाधार बारिश ने मण्डी व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। खुले आसमान के नीचे पड़ी एक लाख से ज्यादा कृषि जिंस की बोरियां पूरी तरह भीग चुकी हैं, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

जाम ने बिगाड़ा खेल: लोडिंग से पहले ही भीगा माल

​मण्डी में दिनभर माल की भारी आवक हुई थी। ऑक्शन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और माल बोरियों में भरकर लोडिंग के लिए तैयार था। इसी बीच झमाझम बारिश शुरू हो गई। मण्डी का क्षेत्रफल कम होने के कारण माल लेकर आए वाहन और लोडिंग के लिए आए ट्रक जाम में फंस गए। नतीजा यह हुआ कि लोडिंग रुक गई और जो माल खुले में पड़ा था, वह मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ गया। देखते ही देखते उच्च गुणवत्ता वाला ‘सोना’ जैसा माल कौड़ियों के भाव (रांगा) जैसा हो गया।

नुकसान का आंकड़ा: एक नजर में

​मण्डी सूत्रों के अनुसार, भीगने वाली प्रमुख जिंसों का विवरण इस प्रकार है:

  • जीरा: 20,000 बोरी
  • रायड़ा: 35,000 बोरी
  • चना: 25,000 बोरी
  • तारामीरा: 7,000 बोरी
  • सौंफ: 5,000 बोरी
  • ईसबगोल: 4,000 बोरी
  • मूंग: 3,000 बोरी
  • हसलिया व सुआ: 2,000 बोरी

बाबूलाल गुप्ता ने उठाई मुआवजे की मांग

​राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने इस आपदा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो माल बिक चुका था उसका नुकसान व्यापारी को हुआ है और जो माल ढेरी में पड़ा था या नीलाम नहीं हुआ था, उसका नुकसान सीधे किसान की कमर तोड़ रहा है।

​”राज्य सरकार आपदा प्रबंधन कोष से व्यापारियों और किसानों को हुए इस करोड़ों के नुकसान की भरपाई करे। यह एक बड़ी त्रासदी है और अन्नदाता को राहत देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।” — बाबूलाल गुप्ता, चेयरमेन, राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ

 

मण्डी विस्तार की पुरानी मांग फिर गरमाई

​गुप्ता ने मण्डी प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मेड़ता मण्डी अपनी क्षमता से बहुत छोटी जगह पर बसी है। यहाँ न केवल स्थानीय बल्कि पड़ोसी जिलों के किसान भी बड़ी उम्मीद लेकर आते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार अविलंब बड़ी जमीन खरीदकर मण्डी का विस्तार करे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

किसानों और व्यापारियों के आंसू पोंछने की दरकार

​वर्तमान में मण्डी में अफरा-तफरी का माहौल है। भीगे हुए माल को सुखाने और बचाने की जद्दोजहद जारी है, लेकिन नमी के कारण माल की गुणवत्ता खराब होना तय है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग के आदेशों पर टिकी हैं कि क्या उन्हें इस आर्थिक चोट से उबारने के लिए कोई पैकेज मिलेगा या नहीं।

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