योगेश शर्मा
न्यूयॉर्क/जयपुर। फैशन की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित आयोजन ‘मेट गाला 2026’ में इस बार राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और जयपुर के राजघराने का दबदबा देखने को मिला। न्यूयॉर्क में आयोजित इस भव्य समारोह के रेड कार्पेट पर जयपुर के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह और उनकी बहन राजकुमारी गौरवी कुमारी ने अपना ऐतिहासिक डेब्यू किया। इस दौरान महाराजा के परिधानों में सजे जयपुर के प्रसिद्ध ज्वैलरी ब्रांड ‘रानीवाला 1881’ के विशेष आभूषणों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
शाही लुक में चार चांद लगाते ‘गजराज’ और ‘मत्स्य’ ब्रोच
महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने अपने रेड कार्पेट लुक के लिए पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिकता के अद्भुत संगम को चुना। उनके परिधान को विशेष रूप से डिजाइन किए गए ‘ऐलिफैंट’ और ‘फिश’ ब्रोच ने एक क्लासिक और रॉयल पहचान दी:
- ऐलिफैंट ब्रोच: राजसी हाथी ‘गजराज’ से प्रेरित यह ब्रोच शक्ति और वैभव का प्रतीक है। इसके केंद्र में एक बेशकीमती टूमलाइन रत्न है, जिसे हीरों और नाजुक मोतियों से जड़कर तैयार किया गया है।
- फिश (मत्स्य) ब्रोच: संस्कृत के ‘मत्स्य’ प्रतीक से प्रेरित यह आभूषण प्रगति और समृद्धि को दर्शाता है। गहरे लाल रूबी, पन्ना और पारंपरिक पोल्की कारीगरी के साथ यह डिजाइन जीवन की गहराई को प्रदर्शित करता है।
- हेरिटेज बटन: उनके परिधान में लगे हैंडक्राफ्टेड बटन धरती की गोलाई से प्रेरित हैं, जो एकता और संतुलन का संदेश देते हैं। यह डिजाइन जयपुर के जौहरी बाजार की उस समृद्ध विरासत को जीवंत करता है, जिसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने संरक्षण दिया था।
”जयपुर के शिल्प के लिए गर्व का क्षण”
इस ऐतिहासिक अवसर पर ‘रानीवाला 1881’ के को-फाउंडर एवं क्रिएटिव डायरेक्टर अभिषेक रानीवाला ने खुशी जाहिर करते हुए कहा:
”राजस्थान की कला और शिल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना हमारे लिए बड़े सम्मान की बात है। जयपुर की मीनाकारी और जड़ाऊ कारीगरी विश्वभर में प्रसिद्ध है। महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह को इन डिजाइंस में देखना न केवल हमारे ब्रांड बल्कि पूरे जयपुर की विरासत के लिए गौरवपूर्ण क्षण है।”
वैश्विक मंच पर राजस्थान की चमक
रेड कार्पेट पर महाराजा के साथ राजकुमारी गौरवी कुमारी की उपस्थिति ने जयपुर की शाही गरिमा को और भी प्रभावशाली बना दिया। मेट गाला जैसे वैश्विक मंच पर जयपुर की पारंपरिक मीनाकारी, पोल्की और राजसी प्रतीकों का यह प्रदर्शन भारतीय कला की वैश्विक स्वीकार्यता को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है। स्थानीय शिल्पकला और शाही परंपरा के इस तालमेल ने न्यूयॉर्क के इस फैशन महाकुंभ में एक अमिट छाप छोड़ी है।