मेघ उत्सव में सूफी-संगीत का जादू, मूरालाला मारवाड़ा की कबीरवाणी ने बांधा समा
मीरा बाई के भजनों और कबीर के पदों ने किया दर्शकों को आत्मविभोर
By : सुनील शर्मा
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 04,2025
जयपुर, 4,अगस्त।
जवाहर कला केंद्र, जयपुर में आयोजित दो दिवसीय मेघ उत्सव का समापन रविवार को सूफी और भक्ति संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच हुआ। गुजरात के कच्छ क्षेत्र से आए विश्वप्रसिद्ध कबीर सूफी गायक मूरालाला मारवाड़ा ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि वातावरण को आध्यात्मिक रस में डुबो दिया।

मूरालाला ने कबीर की अमर वाणी को अपनी विशिष्ट लोक-सूफी शैली में इस तरह पिरोया कि पूरा सभागार भाव-विभोर हो उठा। “मन लागा मेरे यार फकीरी में”, “झीनी-झीनी बीनी चदरिया” जैसे कालजयी पदों के साथ-साथ मीरा बाई के भजनों ने भी श्रोताओं के हृदय को छू लिया। उनके गायन में लोक, सूफी और भक्ति संगीत का ऐसा अद्वितीय संगम देखने को मिला, जिसने मेघ उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया।
शुरुआत से अंत तक संगीतप्रेमियों का उत्साह
कार्यक्रम की शुरुआत से ही सभागार में संगीतप्रेमियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। जैसे-जैसे मूरालाला सुरों के जादू से वातावरण को महकाते गए, वैसे-वैसे तालियों की गड़गड़ाहट तेज होती गई। समापन तक सभागार में “वाह! वाह!” और तालियों की गूंज छाई रही।
विशेष अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर डेल्फिक काउंसिल ऑफ राजस्थान की अध्यक्ष व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्रीमती श्रेया गुहा, रेरा चेयरपर्सन श्रीमती वीनू गुप्ता, पूर्व मुख्य सचिव श्री डी.बी. गुप्ता, प्रमुख महालेखाकार श्री सतीश गर्ग, राजीविका की परियोजना निदेशक श्रीमती नेहा गिरी, आईएएस अधिकारी श्रीमती कविता सिंह एवं श्री निशांत जैन सहित अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।
श्रीमती श्रेया गुहा ने अपने संबोधन में कहा कि “मेघ उत्सव का उद्देश्य मानसून का स्वागत करना और राजस्थान की समृद्ध लोक-संस्कृति को संजोना है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपने अद्वितीय कला कौशल का प्रदर्शन किया है।”
विविध संस्थाओं का संयुक्त आयोजन
इस दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तरी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (पटियाला), पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (उदयपुर), जवाहर कला केंद्र एवं राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में समाज, प्रशासन, राजनीति, मीडिया, शिक्षा और संस्कृति जगत से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में कला-प्रेमियों की उपस्थिति रही।
मेघ उत्सव का यह संगीतमय समापन श्रोताओं के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगा।