मुरलीपुरा में संघ का ‘रणभेरी’ कार्यक्रम: शक्ति और अनुशासन के साथ निकला पथ संचलन, कदमताल से गूंजा इलाका

रिपोर्ट योगेश शर्मा 

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विद्याधर भाग स्थित विजय नगर (मुरलीपुरा) में रविवार को शारीरिक प्रधान कार्यक्रम ‘रणभेरी’ का भव्य आयोजन किया गया। माधव उद्यान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने अपनी शारीरिक दक्षता और अनुशासन का प्रदर्शन किया, जिसके बाद क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से पथ संचलन निकाला गया।

शारीरिक कौशल और अनुशासन का प्रदर्शन

​कार्यक्रम का शुभारंभ माधव उद्यान में निर्धारित समय पर हुआ। पूर्ण गणवेश (यूनिफॉर्म) में सजे स्वयंसेवकों ने शारीरिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी शक्ति का परिचय दिया। इस दौरान दण्ड संचालन, योग, व्यायाम और विभिन्न रक्षात्मक कौशलों का प्रदर्शन किया गया। मैदान में उपस्थित जनसमूह ने स्वयंसेवकों की एकाग्रता और स्फूर्ति को देखकर तालियों से उत्साहवर्धन किया।

संस्कार और संगठन पर जोर

​बौद्धिक सत्र के दौरान वक्ताओं ने संघ के ध्येय ‘शक्ति, संगठन और संस्कार’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘रणभेरी’ जैसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता और आत्मविश्वास जगाना है। वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण के लिए अपने जीवन में अनुशासन को उतारें और संस्कारों के माध्यम से समाज को संगठित करें।

पुष्पवर्षा से स्वागत, गूंजे देशभक्ति के नारे

​शारीरिक प्रदर्शन के पश्चात पथ संचलन प्रारंभ हुआ। संचलन की भव्यता और अनुशासन देखते ही बन रहा था।

  • नन्हे स्वयंसेवकों का उत्साह: संचलन में बाल स्वयंसेवक केशव ने विशेष आकर्षण केंद्र रहा, जो घोष (बैंड) की धुन पर पूरी तन्मयता के साथ वाद्य यंत्र वादन करते हुए चल रहा था।
  • जनता का मिला समर्थन: मुरलीपुरा के विभिन्न मार्गों से गुजरते समय स्थानीय निवासियों ने छतों और दरवाजों से स्वयंसेवकों पर भारी पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
  • राष्ट्रभक्ति का माहौल: पूरे मार्ग में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के जयघोषों से वातावरण गुंजायमान रहा।

एकता का प्रतीक बना संचलन

​यह पथ संचलन केवल एक मार्च न होकर संगठन और राष्ट्रशक्ति का सजीव प्रतीक बनकर उभरा। मार्ग में जगह-जगह रंगोली बनाई गई थी और केसरिया ध्वजों से क्षेत्र को सजाया गया था। कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवकों ने राष्ट्र कल्याण का संकल्प लिया। आयोजन के सफल क्रियान्वयन में स्थानीय संघ पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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