मुख्य सचिव की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक: प्रसव के बाद 24 घंटे धात्री महिलाओं की होगी गहन निगरानी, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की बनेगी नामवार लिस्ट

जयपुर, 19 जुलाई 2026 / नरेश गुनानी/ प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल आवश्यक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल्स की सख्ती से पालना सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से हिदायत दी कि प्रसव के बाद अगले 24 घंटे तक धात्री (स्तनपान कराने वाली) महिला की सघन और गहन निगरानी (Intensive Monitoring) की जाए और उनके पोषण का पूरा ध्यान रखा जाए।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, एनएचएम अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला और आरसीएच निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहे।

​हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की एएनएम से मैपिंग के निर्देश

​मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक उच्च जोखिम वाली (High-Risk) गर्भवती महिला की नामवार सूची (Line-list) तैयार की जाए। इन महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग के लिए हर एक केस को एएनएम (ANM) और सीएचओ (CHO) के साथ अटैच (मैप) किया जाए। आपातकालीन स्थिति के लिए एडवांस में रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

​मुख्य सचिव ने प्रदेशभर के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों (RCHO) को आदेश दिए हैं कि वे सोमवार सुबह ही एएनएम की आपात बैठक लें। इस बैठक में हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की लाइन-लिस्ट और उनके कारणों की विस्तृत समीक्षा की जाए, ताकि समय रहते जरूरी चिकित्सीय कदम (Intervention) उठाए जा सकें।

​6 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं पर विशेष नजर

  • ​अति उच्च जोखिम श्रेणियां: 6 ग्राम या इससे कम हीमोग्लोबिन वाली और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रही गर्भवती महिलाओं की नामवार जानकारी एएनएम के साथ-साथ सीधे जिले के आरसीएचओ और सीएमएचओ के पास भी होनी चाहिए।
  • ​हर तीसरे दिन जांच: ऐसी उच्च जोखिम वाली महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए संबंधित एएनएम द्वारा हर तीसरे दिन उनके घर जाकर या केंद्र पर स्वास्थ्य जांच करना अनिवार्य होगा।
  • ​ब्लड ट्रांस्फ्यूजन: जुलाई महीने के आंकड़ों के अनुसार सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू जिलों में सबसे ज्यादा हाई-रिस्क गर्भवती महिलाएं चिन्हित हुई हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित जिन महिलाओं की डिलीवरी की तारीख (Due Date) नजदीक है, उन्हें आवश्यकतानुसार ब्लड ट्रांस्फ्यूजन, एफसीएम इंजेक्शन या अल्टरनेट डे (एक दिन छोड़कर एक दिन) आयरन शुक्रोज देना सुनिश्चित करें, ताकि प्रसव से पहले उनकी स्थिति को सामान्य या माइल्ड स्तर पर लाया जा सके।

 

​लेबर रूम और ऑपरेशन के लिए एसओपी की पालना अनिवार्य

​वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और गायनी (स्त्री रोग) विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटों में हुए सामान्य व सिजेरियन प्रसवों तथा माताओं की वर्तमान सेहत की जानकारी ली।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक चिकित्सालय में प्रसव और अन्य ऑपरेशन्स के लिए तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOP) की शत-प्रतिशत पालना होनी चाहिए। बैठक में मौजूद चिकित्सा विशेषज्ञों ने लेबर रूम प्रोटोकॉल, इंफेक्शन कंट्रोल, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन मैनेजमेंट और रेफरल प्रोटोकॉल के तकनीकी पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी, जिसे सभी अस्पतालों में सख्ती से लागू करने को कहा गया है।

​ममता कार्ड पर स्पष्ट भाषा में दर्ज हो पूरी जानकारी

​प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने बैठक में प्रसव नियोजन (Delivery Planning) पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति के मुताबिक पहले से ही सही अस्पताल का चयन, प्रसव की संभावित तिथि और रेफरल जैसी व्यवस्थाओं का समुचित प्रबंधन होना चाहिए। उन्होंने फील्ड स्टाफ को सख्त निर्देश दिए कि गर्भवती महिला के ममता कार्ड पर स्वास्थ्य से जुड़ी सभी सही और पूर्ण जानकारियां बिल्कुल स्पष्ट भाषा में अंकित की जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में डॉक्टर को मरीज की हिस्ट्री समझने में कोई दिक्कत न हो।

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