मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पशुपालन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न: भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनेगी ‘स्टेट वेटरनरी पॉलिसी’, मोबाइल वेटरनरी सेवाओं की दैनिक मॉनिटरिंग के निर्देश

जयपुर/ सुनील शर्मा/शासन सचिवालय में बुधवार को पशुपालन विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, पशुपालकों की आय बढ़ाने और पशु चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक स्वरूप देने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए।

​मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य की आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक समग्र और दूरगामी ‘स्टेट वेटरनरी पॉलिसी’ तैयार करने की दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

​’स्टेट वेटरनरी पॉलिसी’ के प्रमुख आधार और प्राथमिकताएं

​मुख्य सचिव ने कहा कि स्वस्थ पशुधन और सशक्त पशुपालक ही ग्रामीण आर्थिकी के मुख्य स्तंभ हैं। प्रस्तावित स्टेट वेटरनरी पॉलिसी में निम्नलिखित बिंदुओं को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए:

  • ​उन्नत तकनीक का समावेश: पशुपालन और रोग नियंत्रण में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग।
  • ​आधारभूत ढांचे का विस्तार: पशु चिकित्सा सुविधाओं, अस्पतालों और संस्थानों का सुदृढ़ीकरण।
  • ​नस्ल सुधार व पोषण: उच्च उत्पादकता वाली उन्नत नस्लों का विकास और पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे की सतत उपलब्धता।
  • ​आय संवर्धन: पशुपालकों की आजीविका सुरक्षित करते हुए उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना।

​मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVUs) की होगी दैनिक मॉनिटरिंग

​प्रदेश में पशुपालकों को घर-द्वार पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सेवाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए:

  • ​राज्य में संचालित सभी 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स की कार्यप्रणाली की दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
  • ​कॉल सेंटर पर पशुपालकों से प्राप्त फोन कॉल्स, जनरेट किए गए टिकट्स, फील्ड विजिट्स और समाधान (क्लोजर रिपोर्ट) की प्रतिदिन विस्तृत मॉनिटरिंग की जाएगी।
  • ​इन सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार कर अधिकतम पशुपालकों तक इनका लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा।

​मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना: राजस्थान देश में शीर्ष पर

​समीक्षा बैठक में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना’ की प्रगति साझा की गई:

  • ​राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी: सर्वाधिक पशु बीमा पॉलिसियां जारी करने के मामले में राजस्थान देश भर में पहले स्थान पर है।
  • ​उपलब्धियां:
    • ​अब तक 43 लाख से अधिक पशुओं का सफल पंजीकरण किया जा चुका है।
    • ​26 लाख से अधिक बीमा पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं।
    • ​पशुपालकों को क्लेम के रूप में 95 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रत्यक्ष भुगतान किया जा चुका है।
  • ​मुख्य सचिव ने योजना के नियमित पर्यवेक्षण पर बल दिया ताकि वास्तविक प्रभावित पशुपालकों को किसी भी प्रकार की देरी के बिना त्वरित आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

​आधुनिक शिक्षा, रिसर्च और डिजिटल वेटरनरी सेवाओं पर बल

​पशु चिकित्सा प्रणाली को भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए मुख्य सचिव ने कई अहम दिशा-निर्देश दिए:

  • ​शिक्षा व अनुसंधान में विस्तार: वेटरनरी कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट (PG) सीटों की संख्या बढ़ाई जाए, नए विशेषज्ञता विभाग खोले जाएं तथा आधुनिक प्रयोगशालाओं व अनुसंधान केंद्रों को सुसज्जित किया जाए।
  • ​डिजिटल एवं टेली-वेटरनरी: दूरदराज के क्षेत्रों में पशु उपचार को सुलभ बनाने के लिए डिजिटल व टेली-कंसल्टेशन सेवाओं को बढ़ावा दिया जाए।
  • ​रोग निगरानी तंत्र: पशु रोगों की समय पर पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं का जाल बिछाया जाए।

​बैठक में पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले सहित विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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