मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशीलता: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में शुरू होगी ‘प्रसव सखी’ व्यवस्था

जयपुर, 22 जुलाई/ मुस्कान तिवाड़ी राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद मानवीय एवं संवेदनशील पहल की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों पर प्रदेश के अस्पतालों में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की देखरेख और मार्गदर्शन के लिए ‘प्रसव सखी’ व्यवस्था शुरू की जा रही है।

​चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था चरणबद्ध रूप से राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों तथा अधिक प्रसव भार वाली प्रथम रेफरल इकाइयों (FRU) में लागू होगी। इसका मुख्य उद्देश्य मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और स्वास्थ्य सेवाओं को पूर्णतः ‘पेशेंट सेंट्रिक’ (मरीज केंद्रित) बनाना है।

​पिंक एप्रिन में तैनात होंगी ‘प्रसव सखी’

​नई व्यवस्था के तहत चयनित महिला स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों एवं ANM को ‘प्रसव सखी’ के रूप में तैनात किया जाएगा। इनकी विशेष पहचान के लिए इन्हें पिंक एप्रिन दिया जाएगा।

  • भर्ती से डिस्चार्ज तक साथ: प्रसव सखी हाई रिस्क गर्भवती महिला के अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव, प्रसवोत्तर (प्रसव के बाद की) देखरेख और डिस्चार्ज होने तक हर कदम पर एक भरोसेमंद साथी की तरह साथ रहेंगी।
  • हर प्रक्रिया में समन्वय: पंजीयन (रजिस्ट्रेशन), आवश्यक जांचें, विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श, दवाएं एवं उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर रेफरल प्रक्रिया में भी ये सखियां सहयोग करेंगी।

​24×7 हेल्प डेस्क और एकीकृत परिवहन प्रणाली

​प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने इस महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि:

​”चिन्हित सभी अस्पतालों में 24×7 ‘मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क’ स्थापित की जाएगी, जो मरीज और परिजनों के लिए पहला संपर्क केंद्र (First Point of Contact) होगी। इसके अलावा 104 जननी एक्सप्रेस, हेल्प डेस्क और प्रसव सखी को आपस में जोड़कर एक एकीकृत व्यवस्था (Integrated System) तैयार की जा रही है।”

 

​इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से गर्भवती महिला को घर से अस्पताल लाने, अस्पताल में प्राथमिकता के आधार पर त्वरित इलाज मुहैया कराने और सुरक्षित प्रसव के बाद वापस घर पहुंचाने की निर्बाध सुविधा मिलेगी।

​मातृ एवं शिशु सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर

​स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय और देखभाल सबसे महत्वपूर्ण होती है। ‘प्रसव सखी’ की नियुक्ति से:

  1. ​हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की निरंतर और प्रभावी ट्रैकिंग संभव होगी।
  2. ​अस्पतालों में लगने वाले समय और भाग-दौड़ से मरीजों को राहत मिलेगी।
  3. ​सुरक्षित संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को प्रोत्साहन मिलेगा।

​राज्य सरकार का यह कदम प्रदेश की गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में अधिक सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण और चिंतामुक्त मातृत्व सेवाएं देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा।

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