नरेश गुनानी
बांसवाड़ा, 21 मई 2026।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बांसवाड़ा जिले के सुदूर आदिवासी अंचल में स्थित चुड़ादा गांव में रात्रि चौपाल लगाने के बाद गुरुवार सुबह एक बार फिर ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सबको चौंका दिया। मुख्यमंत्री ने सुबह-सुबह गांव की गलियों में पैदल भ्रमण किया, स्थानीय लोगों से सीधा संवाद किया और ‘चाय पर चर्चा’ कर जन-मन की बात जानी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास चौपाल संवाद से समाधान का सशक्त माध्यम बन रही है, जहां अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
लापरवाही पर त्वरित एक्शन: कुशलगढ़ बीसीएमओ एपीओ
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्य में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ सख्त रुख दिखाया। ग्रामीणों और कार्मिकों द्वारा कुशलगढ़ के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ) डॉ. गिरिश भाभोर के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने आदेश जारी कर डॉ. गिरिश भाभोर को तत्काल प्रभाव से एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया।
पीपल के पेड़ के नीचे लगी चौपाल, हीरन नदी पर बनेगा एनिकट
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने परंपरा के अनुरूप पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों के अभाव-अभियोग सुने। पानी की समस्या पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने जिला कलेक्टर को सिंचाई के लिए हीरन नदी पर एनिकट निर्माण करने तथा पेयजल स्रोतों को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री मां बाड़ी केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों से मुलाकात कर उन्हें दुलार किया। उन्होंने बच्चों को चॉकलेट बांटी और उन्हें पढ़-लिखकर उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और युवाओं को नशे की लत से दूर रखने का आह्वान किया।
जनहित की मांगों पर तुरंत जारी हुई वित्तीय स्वीकृतियां
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चाय की चुस्कियों के बीच संवाद करते हुए उनकी मांगों का मौके पर ही निपटारा किया। उनके निर्देशों पर निम्नलिखित विकास कार्यों की स्वीकृतियां तुरंत जारी की गईं:
- 16.20 लाख रुपये: गांव ठुम्मठ में मां बाड़ी केंद्र निर्माण के लिए।
- 20 लाख रुपये: ठुम्मठ चौराहा पर सिंगल फेज ट्यूबवेल निर्माण के लिए।
- 7 लाख रुपये: ग्राम चुड़ादा में मामा बालेश्वर दयाल मंदिर परिसर में इंटरलॉकिंग एवं सौंदर्यीकरण कार्य के लिए।
- अन्य निर्देश: राजकीय विद्यालय में दो नए कक्षा-कक्षों के निर्माण और गांव के समीप दूध संकलन केंद्र की स्थापना के लिए भी अधिकारियों को पाबंद किया गया।
संवेदनशीलता: पीड़ित बच्चे की मां की गुहार पर ट्रांसफर के निर्देश
दौरे के दौरान रोशनी कलाल नामक महिला ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित पुत्र की बीमारी का हवाला दिया। महिला ने अपने पति हेमेंद्र कुमार कलाल (सहायक अभियंता) का पदस्थापन सागवाड़ा से बांसवाड़ा करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संवेदनशीलता दिखाई और तुरंत हेमेंद्र कुमार का पदस्थापन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के परियोजना खंड बांसवाड़ा में करने के निर्देश दिए, जिसकी अनुपालना अधिकारियों ने तुरंत आदेश जारी कर दी।
खेती को लाभदायक बनाएं और जल संरक्षण को जन आंदोलन दें रूप
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि पानी का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए इसकी हर बूंद का सदुपयोग जरूरी है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को जोड़ने, माइक्रो सिंचाई, वर्षा जल संग्रहण, आधुनिक खेती और डिग्गी निर्माण पर ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने डूंगरपुर क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता से हुए जल संरक्षण कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब गांव मिलकर जल स्रोतों को सहेजते हैं, तो पूरा क्षेत्र समृद्ध होता है। गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा कर युवाओं के पलायन को रोका जा सकता है।
दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी
इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध संत मामा बालेश्वर दयाल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।