मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पशुपालन विभाग में व्यापक बदलाव
दो वर्षों में रिकॉर्ड नियुक्तियां, संस्थानों का विस्तार और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार
| नरेश गुनानी
जयपुर, 09 दिसंबर।
राज्य में पशुपालकों तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं तेज, सरल और आधुनिक तरीके से पहुंचाने के लिए पशुपालन विभाग ने पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। पशुपालन, डेयरी, गोपालन और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विभाग ने योजनाओं के क्रियान्वयन और सेवाओं के विस्तार में नई गति प्राप्त की है।
रिकॉर्ड स्तर पर भर्ती, मैनपावर की कमी दूर
विभाग लंबे समय से कार्मिक कमी का सामना कर रहा था। इस स्थिति को बदलने के लिए दो वर्षों में अभूतपूर्व नियुक्तियां की गईं।
- वर्ष 2019 से लंबित भर्ती प्रक्रिया पूरी कर 727 पशु चिकित्साधिकारियों को नियमित नियुक्ति
- आवश्यक जिलों में अस्थायी आधार पर 500 पशुधन सहायकों और 125 पशु चिकित्साधिकारियों की नियुक्ति
- 1100 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ
तकनीकी सहयोगी कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए—
- 5778 पशु परिचरों की नियुक्ति पूरी, शेष 774 की नियुक्ति प्रक्रिया इस माह पूर्ण
- पशुधन निरीक्षक के 2783 पदों पर भर्ती का चयन एवं दस्तावेज सत्यापन कार्य पूर्ण, जल्द जारी होंगे नियुक्ति आदेश
मंत्री कुमावत के अनुसार यह नियुक्तियां विभाग के इतिहास में सबसे तेज और अधिकतम मात्रा में की गई हैं।
पशु चिकित्सा संस्थानों का विस्तार और उन्नयन
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से संस्थागत संरचना में बड़े स्तर पर सुधार किए गए—
- 50 प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों को बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत
- 101 चिकित्सालय प्रथम श्रेणी में उन्नत
- 151 उपकेन्द्र पशु चिकित्सालय में परिवर्तित
- 2 नए पशु चिकित्सालय और 700 नए उपकेंद्र स्वीकृत
इनके साथ कुल 2423 नए पद सृजित किए गए।
इसके अतिरिक्त—
राज्यभर में 100 पशु चिकित्सालयों और 475 उपकेंद्रों में आधारभूत ढांचा विकसित करने हेतु 200 करोड़ रुपए की लागत से भवन निर्माण, फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
सेवाओं का दायरा बढ़ा, पशुपालकों को लाभ
पिछले दो वर्षों में—
- टीकाकरण सेवाओं की उपलब्धता
- शल्य चिकित्सा क्षमताओं में सुधार
- पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम
- डेयरी सुधार से जुड़ी गतिविधियां
इन सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को उनके नजदीक उपचार सुविधा मिल रही है, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुधन विकास और किसान कल्याण में योगदान
मंत्री कुमावत ने कहा कि सरकार का दो वर्ष का कार्यकाल पशुपालकों और किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा है। विभाग ने योजनाओं का विस्तार करते हुए—
✔ रोग नियंत्रण
✔ पशुधन संरक्षण
✔ सेवा पारदर्शिता
✔ नवाचार आधारित प्रक्रियाएं
✔ आयवृद्धि आधारित मॉडल
जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण आजीविका में पशुधन की भूमिका को देखते हुए आगे भी सेवाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि पशुपालकों की आय और पशुधन संरक्षण दोनों को स्थायी आधार मिल सके।

