मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता हो रही सशक्त
नवीन को-ऑपरेटिव कोड से कामकाज में आएगी गति, पारदर्शिता होगी सुनिश्चित — सहकारी सोसायटियों में अनियमितताओं पर नियंत्रण होगा स्थापित
नरेश गुनानी • वरिष्ठ पत्रकार
10 अक्टूबर 2025, जयपुर।
राज्य सरकार सहकारी सोसायटियों में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनियमितताओं पर नियंत्रण और समितियों की व्यवसाय वृद्धि के लिए कृतसंकल्पित है। इसी क्रम में सरकार सोसायटियों तथा आमजन के हित में सहकारी कानून को अधिक प्रासंगिक बनाते हुए नवीन सहकारी अधिनियम लाने जा रही है। प्रस्तावित अधिनियम में ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे आमजन का सहकारी समितियों पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।
प्रस्तावित नवीन सहकारी अधिनियम वर्तमान में लागू राजस्थान सहकारिता अधिनियम, 2001 का स्थान लेगा। इसे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अधिक व्यवहारिक और आधुनिक बनाया गया है। इस संबंध में गठित पांच सदस्यीय समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और केरल जैसे सहकारी आंदोलन के अग्रणी राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर तथा विशेषज्ञों से विमर्श के बाद नया को-ऑपरेटिव कोड ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनियमितताओं पर नियंत्रण, समितियों की व्यवसायिकता में वृद्धि, लोकतांत्रिक एवं सदस्योन्मुखी प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
आमजन को कराया जा रहा है जागरूक
2 से 15 अक्टूबर तक चल रहे ‘सहकार सदस्यता अभियान’ के तहत आमजन को प्रस्तावित अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जा चुका है।
नए अधिनियम में सहकारी समितियों को अपने उत्पादों की बिक्री अपने कार्यक्षेत्र से बाहर करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, बाजार प्रतिस्पर्धा और व्यवसाय वृद्धि के लिए आपसी सहमति से साझेदारी करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
राज्य और केंद्र सरकार की ओर से सोसायटियों में शेयर पूंजी धारण की अधिकतम सीमा समाप्त करने, नई सोसायटियों के गठन को गति देने तथा आवश्यकता पड़ने पर रजिस्ट्रार द्वारा तीन माह की तदर्थ समिति गठित करने का प्रावधान भी शामिल है।
आम सभाओं के आयोजन और पारदर्शिता पर विशेष बल
नए अधिनियम में सहकारी समितियों की आम सभा के आयोजन को सुगम बनाने के लिए सदस्यों को व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से सूचना भेजने का प्रावधान किया गया है। आम सभा आयोजित न करने पर जिम्मेदार व्यक्ति पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा।
यदि कोई संचालक मंडल सदस्य बिना अनुमति तीन बैठकों में लगातार अनुपस्थित रहता है, तो उसे निर्योग्य घोषित किया जाएगा। जिन सोसायटियों को सरकारी सहायता प्राप्त नहीं है, उन्हें अधिनियम के तहत वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी।
वेब पोर्टल से मिलेगी वित्तीय जानकारी
सोसायटियों में समयबद्ध ऑडिट सुनिश्चित करने के लिए भी नए अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए हैं। सोसायटी को ऑडिटर नियुक्ति का प्रस्ताव उसी वित्तीय वर्ष में विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना होगा, अन्यथा रजिस्ट्रार द्वारा ऑडिटर नियुक्त किया जा सकेगा।
सोसायटी की वित्तीय स्थिति से आमजन को अवगत कराने के लिए ऑडिट रिपोर्ट जारी होने के 15 दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
गबन या अनियमितताओं के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट, जांच या निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आरोप तय कर विचारण की प्रक्रिया प्रस्तावित है। राज्य सरकार की अनुशंसा पर भी जांच करवाई जा सकेगी।
जमाकर्ताओं और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा
क्रेडिट सोसायटियों में जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सदस्य बनाकर ही जमा स्वीकार करने का प्रावधान किया गया है। इन सोसायटियों के कार्यकलापों के नियमन के लिए विनियामक बोर्ड के गठन का भी प्रस्ताव है।
हाउसिंग सोसायटियों में धोखाधड़ी रोकने हेतु राज्य सरकार नियम बना सकेगी। साथ ही, ‘सहकारी’ शब्द के दुरुपयोग पर 50 हजार रुपये के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है।
नए अधिनियम में व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से नोटिस एवं आदेश की तामीली, तथा सोसायटी या उसके सदस्यों के हित में रजिस्ट्रार को आवश्यक निर्देश देने की शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं।

