मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशीलता से प्रशस्त हुई ’राहत की राह’
मुख्यमंत्री के निर्देश पर फील्ड में उतरे अधिकारी, युद्धस्तर पर जुटा जयपुर जिला प्रशासन — नगर निगमों व जयपुर विकास प्राधिकरण से समन्वय कर प्रभावितों तक पहुंचाई राहत — शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक योजनाबद्ध रूप से किया आपदा प्रबंधन — भोजन से लेकर आवास तक की सुनिश्चित हुई व्यवस्थाएं
04 सितम्बर 2025, 06:13 PM नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स।
जयपुर, 04 सितम्बर। जयपुर जिले में लगातार हुई बारिश से कई क्षेत्रों में जलभराव और जनजीवन प्रभावित हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशीलता और प्रभावितों तक हर संभव मदद पहुंचाने की मंशा को मूर्त रूप देते हुए जयपुर जिला प्रशासन ने जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के नेतृत्व में नगर निगम जयपुर हेरिटेज, नगर निगम जयपुर ग्रेटर, जयपुर विकास प्राधिकरण, नागरिक सुरक्षा और एसडीआरएफ जैसी सभी इकाइयों को समन्वित कर त्वरित कार्रवाई की। प्रशासन ने मिशन मोड में राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर प्रभावितों तक समय पर मदद पहुंचाई।
पिछले तीन दिनों में भारी बारिश के दौरान नगर निगम जयपुर हेरिटेज को 330 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनका तुरंत निस्तारण किया गया। जलभराव और मिट्टी कटाव रोकने के लिए 19,800 मिट्टी के कट्टों का उपयोग, 15 पंप की स्थापना, जवाहर नगर कच्ची बस्ती में तीन अतिरिक्त पंप लगाए गए। साथ ही 3,100 फीट सड़क मरम्मत और 180 नालों व मैनहोल पर कवर लगाए गए। विद्युत से जुड़ी 450 शिकायतों में से 280 का तत्काल समाधान किया गया। राहत कार्यों में 7 जेसीबी, 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 4 डंपर लगाए गए।
नगर निगम जयपुर ग्रेटर को 339 शिकायतें मिलीं, जिनका निस्तारण तुरंत किया गया। सीकर रोड, खो नागोरियान, मोती डूंगरी मंदिर के पीछे और मालपुरा गेट सहित कई जगहों से जलभराव हटाया गया। टोंक रोड वार्ड 95 में क्षतिग्रस्त मेन सीवर लाइन की तुरंत मरम्मत करवाई गई।
जयपुर विकास प्राधिकरण को 196 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनका निस्तारण किया गया। जेडीए ने 118 स्थानों पर पंप भेजकर पानी निकासी करवाई, 45 स्थायी जलभराव बिंदुओं पर पंप संचालित किए। निचले इलाकों में राहत पहुंचाने हेतु 10,925 मिट्टी के कट्टे वितरित किए गए। साथ ही बनीपार्क केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अलावा शहर में 12 उप-केंद्र स्थापित किए, जहां सभी शिकायतों का समाधान किया गया।
नागरिक सुरक्षा टीमों ने 9 रेस्क्यू ऑपरेशन कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। ठीकरिया गुर्जरान, जयसिंहपुरा खोर, सागर रोड आमेर और गलता मंदिर रोड से प्रभावित लोगों को निकाला गया। एसडीआरएफ ने दूदू क्षेत्र में छापरवाड़ा बांध ओवरफ्लो से फंसे 4 लोगों को बचाया। कोटखावदा क्षेत्र में नालावास बांध टूटने पर रेस्क्यू टीम तैनात की गई।
वर्तमान में जयपुर शहर में 16 बाढ़ नियंत्रण केंद्र सक्रिय हैं — हेरिटेज के 3, ग्रेटर के 4 और जेडीए के 9। इन केंद्रों पर रेस्क्यू टीमें लगातार कार्यरत हैं और सहायता उपलब्ध करा रही हैं।
डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के नेतृत्व में राहत व बचाव कार्य अनुकरणीय उदाहरण बन गया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और राजस्व अधिकारी फील्ड में जाकर स्थिति का आकलन कर मौके पर आवश्यक कदम उठा रहे हैं। प्रभावित परिवारों को राशन किट, फूड पैकेट, सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। कोटखावदा जैसे अतिप्रभावित इलाकों में विशेष अधिकारियों की तैनाती की गई है।
फसल नुकसान का सर्वे गांव-गांव किया जा रहा है ताकि प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा मिल सके। जलभराव वाले इलाकों में चेतावनी बोर्ड और लाउडस्पीकर से लगातार लोगों को सचेत किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। किसी भी आपात स्थिति में दूरभाष नंबर 0141-2204475 और 0141-2204476 पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन ने अपील की है कि लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें और प्रशासन को सहयोग दें।

