ब्यावर, 17 जून 2026 | लोकेंद्र सिंह शेखावत
जमीन-जायदाद के पारिवारिक और आपसी बंटवारे अक्सर सालों-साल अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्करों में दबे रहते हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि परिवारों में लाठी-भाटा जंग और खून-खराबे की नौबत आ जाती है। लेकिन राजस्थान सरकार के विशेष सेवा शिविरों ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। ऐसा ही एक सुखद मामला ब्यावर जिले की जवाजा पंचायत समिति के अतीतमण्ड गांव से सामने आया है, जहां जयसिंह का बरसों से अटका भूमि बंटवारा महज एक घंटे के भीतर शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।
साझा जमीन के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित थे जयसिंह
अतीतमण्ड निवासी जयसिंह पुत्र गोकुल सिंह अपनी खातेदारी भूमि का कानूनी बंटवारा न होने के कारण लंबे समय से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान चल रहे थे। जमीन साझा होने की वजह से उन्हें कृषि कार्यों के लिए बैंक से लोन लेने, सरकारी सब्सिडी पर उन्नत बीज व आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने और ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना का सीधा लाभ लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
हर सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए उन्हें पहले जमीन के अन्य साझेदारों के चक्कर काटने पड़ते थे और मान-मनौव्वल के बाद भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। इसके अलावा, जमीन का स्पष्ट मालिकाना हक न होने के कारण हमेशा धोखाधड़ी होने और भविष्य में परिवार में लड़ाई-झगड़ा होने का डर सताता रहता था।
सेवा शिविर बना मददगार, 60 मिनट में तैयार हुआ प्रस्ताव
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर आमजन की इसी पीड़ा को दूर करने के लिए गत 12 जून से प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘ग्रामीण सेवा शिविर’ आयोजित किए जा रहे हैं। जब अतीतमण्ड में इस शिविर के आयोजन की सूचना जयसिंह को मिली, तो वे अपनी उम्मीद लेकर शिविर में पहुंचे और शिविर प्रभारी को प्रार्थना पत्र सौंपा।
इसके बाद सरकारी तंत्र ने जो तत्परता दिखाई, वह नजीर बन गई:
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- त्वरित आदेश: शिविर प्रभारी (उपखण्ड अधिकारी) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत तहसीलदार को खातेदारी भूमि का बंटवारा कर प्रकरण सामने पेश करने को कहा।
- मौके पर पैमाइश: ब्यावर तहसीलदार के निर्देश पर हलका पटवारी और गिरदावर तुरंत एक्शन में आए। उन्होंने मौके (जमीन) पर जाकर बिना किसी विवाद के आपसी सहमति से बंटवारे का कानूनी प्रस्ताव तैयार किया।
- ऑन-द-स्पॉट मंजूरी: पटवारी और गिरदावर ने यह प्रस्ताव शिविर में मौजूद तहसीलदार के समक्ष पेश किया, जिसे तहसीलदार ने तुरंत कानूनी स्वीकृति दे दी।
राहत की घड़ी: आवेदन करने से लेकर जमीन के कागजात जयसिंह के हाथ में आने तक की यह पूरी जटिल कानूनी प्रक्रिया महज 1 घंटे के भीतर पूरी हो गई।
“हमें हीरे जैसा मुख्यमंत्री मिला है” — जयसिंह ने जताया आभार
बरसों की चिंता से सिर्फ एक घंटे में मुक्ति मिलने पर जयसिंह भावुक हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए उनकी कार्यशैली की खुलकर तारीफ की। जयसिंह ने कहा:
”आमतौर पर नेता सिर्फ मंचों से लंबे-चौड़े भाषण और खोखले आश्वासन देते हैं, लेकिन हमारे मुख्यमंत्री बिना शोर-शराबे के सीधे पब्लिक के काम कर रहे हैं। हम राजस्थान वाले बेहद सौभाग्यशाली हैं कि हमें हीरे जैसा संवेदनशील मुख्यमंत्री मिला है, जो सीधे गरीबों के दर्द को समझता है। भगवान मुख्यमंत्री को हमेशा स्वस्थ रखे और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद दे।”
इस त्वरित समाधान से न केवल जयसिंह को उनके हक की जमीन मिल गई, बल्कि भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित पारिवारिक जमीन विवाद की आशंका भी हमेशा के लिए समाप्त हो गई। ग्रामीण सेवा शिविरों की यह सफलता अब गांवों में चर्चा का विषय बनी हुई है।