मुख्यमंत्री का लाडनूं दौरा: जैन धर्म के सिद्धांतों को बताया मानवता का रक्षक
| नरेश गुनानी
लाडनूं/जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शुक्रवार को डीडवाना-कुचामन जिले के लाडनूं प्रवास पर रहे। यहाँ उन्होंने जैन विश्व भारती परिसर में नवनिर्मित ‘सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल’ का भव्य लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद प्राप्त किया और जैन दर्शन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे जीवन जीने की एक पूर्ण कला बताया।
जैन धर्म: भौतिकवादी युग में शांति का मार्ग
समारोह को संबोधित करते हुए भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैन धर्म के पंच महाव्रत आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
- जैन दर्शन का ‘जियो और जीने दो’ का मूलमंत्र पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा आधार है।
- संयम और सादगी के बिना मानवता का भविष्य सुरक्षित नहीं है।
- संत और मुनि समाज को सही दिशा दिखाते हुए हमारी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर ले जाते हैं।
आचार्य महाश्रमण: मानवीय मूल्यों के जीवंत प्रतीक
मुख्यमंत्री ने आचार्य महाश्रमण की साधना और त्याग की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन संपूर्ण मानव कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने आचार्य की शिक्षाओं को सरल और व्यावहारिक बताया, जो हर वर्ग के व्यक्ति को प्रेरित करती हैं। भजनलाल शर्मा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण ने प्राचीन परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़कर समाज को एक नई दृष्टि प्रदान की है।
जैन विश्व भारती का योगदान
मुख्यमंत्री ने संस्थान के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए कहा कि आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा रोपित यह पौधा आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।
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- शिक्षा और संस्कार: यहाँ विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ जीवन जीने के संस्कार भी दिए जाते हैं।
- वैश्विक पहचान: यह संस्थान विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और अहिंसा के संदेश का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
- नया केंद्र: नवनिर्मित सुधर्मा सभा हॉल आने वाले समय में धार्मिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों के प्रसार का प्रमुख केंद्र बनेगा।
”राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और इसे नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना है।” — भजनलाल शर्मा
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व
लोकार्पण समारोह के दौरान आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र की कई विभूतियां उपस्थित रहीं:
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- साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा एवं मुनि महावीर कुमार।
- राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी।
- जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़।
- बड़ी संख्या में जैन मुनि, साध्वी गण और स्थानीय नागरिक।
