जयपुर, 13 अगस्त 2026 / नरेश गुनानी
राजस्थान में नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के क्षमता संवर्धन (कैपेसिटी बिल्डिंग) के लिए शुरू की गई पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत आयोजित ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ की राष्ट्रीय कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन ने सराहना की है। कमीशन ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के नेतृत्व और इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए राजस्थान को वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल बताया है।
70 वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिक-केंद्रित सुशासन पर किया मंथन
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की पहल पर कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन के सहयोग से 10 अगस्त को एचसीएम रीपा (HCM RIPA) में ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ के वरिष्ठ अधिकारी संस्करण का आयोजन किया गया था।
दो बैचों में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राज्य सरकार के 70 वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया:
- प्रशासनिक मूल्य और उद्देश्य: लोक सेवा में नैतिक मूल्यों, जवाबदेही और स्पष्ट उद्देश्य की भूमिका पर गहराई से चर्चा।
- सेवा प्रदायगी में सुधार: बदलती प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने और जनसेवा को सुगम बनाने पर जोर।
- संवेदनशील प्रशासन: नागरिकों की अपेक्षाओं के प्रति अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी व्यवस्था विकसित करने का संकल्प।
कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन ने की शीर्ष नेतृत्व की सराहना
कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन ने पूरे कार्यक्रम में मुख्य सचिव की सक्रिय भागीदारी की विशेष रूप से प्रशंसा की। कमीशन ने इसे ‘उदाहरण प्रस्तुत करने वाला नेतृत्व’ (Leading by Example) करार देते हुए कहा कि जब राज्य का शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व स्वयं नागरिक-केंद्रित शासन और नैतिक मूल्यों पर चिंतन के लिए समय देता है, तो इससे पूरे प्रशासनिक ढांचे को प्रेरणा मिलती है।
”राजस्थान का यह प्रयास ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप है। भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक सक्षम, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा के निर्माण की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनुकरणीय कदम है।” — कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
मिशन कर्मयोगी के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान में वरिष्ठ स्तर पर आयोजित यह कार्यक्रम प्रशासनिक नेतृत्व को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। अधिकारियों में कर्तव्यबोध, उत्तरदायित्व और ‘नागरिक-प्रथम’ के दृष्टिकोण को सशक्त बनाकर यह पहल राज्य में जनसेवा के स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।