मानसून में बदहाल जयपुर: सड़कों पर बहता सीवरेज, विकास के दावों की खुली पोल

मानसून में बदहाल जयपुर: सड़कों पर बहता सीवरेज, विकास के दावों की खुली पोल
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जताई सख्ती, जिम्मेदार अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

रिपोर्ट: टेलीग्राफ टाइम्स टीम
Edited By : गौरव कोचर 
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 27,2025

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में मानसून की पहली ही बारिश ने नगर निगम और जेडीए की तैयारियों की पोल खोल दी है। खासकर चौमू पुलिया से लेकर सीकर रोड तक का इलाका इन दिनों सीवरेज के गंदे पानी से बेहाल है। यह वही सड़क है जो राजधानी को प्रदेश के 5 अहम जिलों से जोड़ती है, लेकिन बारिश के साथ ही यह रास्ता बदहाल हो गया है।

गंदे पानी से सड़कों पर बना ‘तालाब’, कारोबार ठप

सीकर रोड पर सीवरेज का गंदा पानी सड़कों पर इस कदर फैल चुका है कि न केवल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, बल्कि सड़क किनारे दुकान लगाने वाले फल-सब्जी विक्रेताओं को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। गंदगी और बदबू से लोग परेशान हैं, वहीं ग्राहक भी ऐसे माहौल में पहुंचने से कतरा रहे हैं, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है।

जेडीए और नगर निगम में ठीकरा-फोड़ राजनीति

हालात सुधारने के बजाय जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और नगर निगम आपसी टकराव में ही उलझे हुए हैं। दोनों विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इस आपसी खींचतान का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। NHAI ने अस्थायी रूप से रूट बदलकर वाहनों की आवाजाही को डाइवर्ट किया है, लेकिन यह भी समाधान नहीं बन सका।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने लगाई फटकार

मामला सामने आने के बाद राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जनता को परेशानी में छोड़ने वाले लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही समय पर समाधान नहीं निकालने वाले विभागीय प्रमुखों से जवाब-तलब करने के निर्देश दिए हैं।

कागजों में दावे, ज़मीनी हकीकत ज़रा अलग

हर साल मानसून से पहले नगर निगम और जेडीए लाखों-करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत करते हैं। दावा किया जाता है कि सड़कों की मरम्मत और 650 से अधिक नालों की सफाई समय पर पूरी कर ली जाएगी, लेकिन हकीकत हर बार की तरह इस बार भी कुछ और ही नजर आ रही है।

मीटिंग पर मीटिंग, समाधान कहीं नहीं

प्रशासनिक अफसर मानसून से पहले घंटों बंद कमरों में बैठकों में उलझे रहते हैं, लेकिन इन बैठकों से निकलकर न तो कोई ठोस योजना सामने आती है, न ही परिणाम। सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं और उनका हिसाब कौन देगा?


जनता का सवाल: कब मिलेगा स्थायी समाधान?

जयपुर की बदहाल सड़कों, जलभराव और सीवरेज जैसी समस्याएं अब साल-दर-साल की कहानी बन चुकी हैं। विश्व विरासत का दर्जा रखने वाले इस शहर में इस तरह की स्थिति चिंता का विषय है। जनता अब पूछ रही है—क्या जिम्मेदार एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जाएगा या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

 

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