मानसून की सुस्त चाल: श्रीलंका में ठहराव के बाद अब 3-4 जून को धीरे से होगी भारत के ‘बॉर्डर’ पर एंट्री

नई दिल्ली , लोकेंद्र सिंह शेखावत 

भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ते पारे के बीच देशवासियों के लिए मौसम विभाग से एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। पहले जहां कयास लगाए जा रहे थे कि दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) इस बार तय समय से पहले या धमाकेदार अंदाज में दस्तक देगा, वहीं अब इसकी रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगता दिख रहा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, मानसून फिलहाल श्रीलंका और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में पूरी तरह सक्रिय होकर ठहर गया है। अब इसके किसी ‘धमाकेदार’ शुरुआत के बजाय बेहद शांत और धीमी गति से 3-4 जून के आसपास भारतीय सीमा (केरल तट) को पार करने की संभावना जताई जा रही है।

​श्रीलंका में जमावड़ा, भारत को थोड़ा और इंतजार

​मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमानों और उपग्रहीय तस्वीरों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों और अरब सागर के निचले इलाकों में पूरी तरह से स्थापित (Establish) हो चुका है। श्रीलंका के कई प्रांतों में बीते कुछ दिनों से भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है।

​मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के वायुमंडलीय सिस्टम में आए मामूली बदलावों के कारण मानसूनी हवाओं की गति थोड़ी धीमी पड़ी है। यही वजह है कि मानसून पिछले कुछ दिनों से श्रीलंका के आसपास ही रुका हुआ है और भारत के मुख्य भूभाग की तरफ बढ़ने के लिए आवश्यक गति नहीं पकड़ पा रहा है।

​3-4 जून को केरल तट पर दस्तक की उम्मीद

​शुरुआती अनुमानों में माना जा रहा था कि मानसून 31 मई या 1 जून तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसकी तारीखों में थोड़ा बदलाव हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार:

  • ​मानसून अब 3 से 4 जून के बीच केरल के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकता है।
  • ​इस बार केरल के तटों पर मानसूनी बादलों की एंट्री बहुत अधिक आक्रामक या तूफानी नहीं होगी, बल्कि यह धीरे-धीरे और शांति से आगे बढ़ेगा।
  • ​हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इस सुस्त शुरुआत से देश के कुल मानसून पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। एक बार मुख्य भूमि पर सक्रिय होने के बाद यह रफ्तार पकड़ सकता है।

​देश के अन्य हिस्सों में कब पहुंचेगा मानसून?

​मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए शुरुआती रोडमैप के अनुसार, भले ही केरल में इसकी शुरुआत धीमी हो, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में इसका सफर क्रमिक रहेगा:

  1. पूर्वोत्तर भारत: केरल में दस्तक के साथ ही मानसून की एक शाखा पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय, नगालैंड) की तरफ रुख करेगी।
  2. मध्य और पश्चिम भारत: जून के दूसरे और तीसरे हफ्ते के दौरान मानसून के महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
  3. उत्तर भारत व राजस्थान: दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसून के अपने नियत समय यानी जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह (5 जुलाई तक) के बीच पहुंचने की संभावना है।

​कृषि और आम जनमानस पर असर

​मानसून के इस बदले मिजाज पर कृषि विशेषज्ञों की भी पैनी नजर है। जानकारों का मानना है कि 3-4 जून की एंट्री फसलों की बुवाई के लिहाज से बहुत ज्यादा लेट नहीं है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग के आगामी अपडेट्स को देखकर ही खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी करें। फिलहाल, उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में जारी भीषण हीटवेव (Heatwave) से राहत पाने के लिए लोगों को जून के पहले हफ्ते तक प्री-मानसून गतिविधियों (Pre-Monsoon Activities) का ही सहारा लेना होगा।

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