नियंत्रण कक्ष स्थापित करने, सीवर लाइन व नालों की सफाई का प्रमाणीकरण और सत्यापन कराने के दिए निर्देश
जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और पुराने निजी भवनों को चिन्हित कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा
सुनील शर्मा
जयपुर, 8 जून 2026। आगामी मानसून सत्र की पूर्व तैयारियों के संबंध में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला कलक्टर एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण संदेश नायक ने की। बैठक में जिला कलक्टर ने स्पष्ट किया कि आपदा के दौरान आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और जनजीवन प्रभावित न हो।
जिला कलक्टर ने सभी उपखण्ड अधिकारियों और जिलास्तरीय अधिकारियों को बाढ़ नियंत्रण कक्षों की तत्काल स्थापना करने तथा वहां आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नालों की सफाई का होगा प्रमाणीकरण और भौतिक सत्यापन
शहर में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जिला कलक्टर ने नगर निगम को जयपुर शहर की सीवर लाइन और छोटे-बड़े गंदे नालों की तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए हैं। इस कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए संबंधित अधिशाषी एवं सहायक अभियंताओं से सफाई का प्रमाणीकरण कराया जाएगा। इसके साथ ही, संबंधित उपखण्ड अधिकारियों और तहसीलदारों को टीम बनाकर इस सफाई कार्य का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जर्जर भवनों और जलभराव क्षेत्रों पर रहेगी नजर
सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए जिले के सभी पुराने व जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा पुराने निजी जर्जर भवनों का बारीकी से निरीक्षण करने और उन्हें चिन्हित कर आवश्यक कानूनी व सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जिले के जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां आवश्यकतानुसार फॉगिंग और एंटी-लार्वा एक्टिविटी चलाने के लिए नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों के अधिकारियों को पाबंद किया गया है।
विभागों को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां:
- जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED): मानसून के दौरान स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए कहा गया है। पेयजल आपूर्ति लाइनों में वर्षा का दूषित पानी न मिले, इसके लिए निरंतर और प्रभावी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
- विद्युत विभाग: मानसून से पहले ढीले तारों को कसवाने, जमीन पर रखे गए ट्रांसफार्मरों को ऊंचाई पर शिफ्ट करने और उनके चारों ओर सुरक्षा अवरोधक (बैरिकेडिंग) लगवाने के निर्देश दिए गए हैं।
- जल संसाधन विभाग: जिले के सभी छोटे-बड़े तालाबों की निरंतर निगरानी रखने और समय रहते उन पर आवश्यक मरम्मत कार्य पूर्ण कराने की जिम्मेदारी दी गई है। नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में आने वाले राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर रपट या पुल आदि पर पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में तत्काल चेतावनी बोर्ड लगाने को कहा गया है।
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को जल जनित बीमारियों और मलेरिया की रोकथाम के लिए जीवन रक्षक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- पशुपालन विभाग: पशुओं में होने वाली मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए पर्याप्त मात्रा में टीकाकरण और जीवन रक्षक औषधियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
- रसद विभाग: जिला रसद अधिकारी को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले में पर्याप्त मात्रा में रसोई गैस, केरोसिन, डीजल, पेट्रोल और आवश्यक खाद्य सामग्री का बफर स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस): नागरिक सुरक्षा उपनियंत्रक को बाढ़ बचाओ टीम में आवश्यकतानुसार दक्ष व प्रशिक्षित तैराकों, गोताखोरों और रेस्क्यूअर स्वयंसेवकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही उपखण्ड स्तर पर भी सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों और आपदा प्रबंधन के न्यूनतम संसाधनों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस उच्च स्तरीय बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयपुर दक्षिण युगांतर शर्मा सहित नगर निगम जयपुर, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जयपुर विद्युत वितरण निगम, जल संसाधन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, पुलिस विभाग, एसडीआरएफ (SDRF), गृह रक्षा विभाग, रेलवे, जयपुर मेट्रो और शिक्षा विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।