जोधपुर • नरेश गुनानी •भीड़-भाड़ वाले माहौल में किसी की आवाज़ को स्पष्ट रूप से सुनना हो, अचानक सामने आए खतरे पर पल भर में प्रतिक्रिया देनी हो या फिर उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त का धुंधला पड़ना—मानव मस्तिष्क की ये जटिल प्रक्रियाएं हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल का विषय रही हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर की कॉग्निटिव ब्रेन डायनेमिक्स लैब (CBDL) में अब इन रहस्यों को सुलझाने और भविष्य की न्यूरो-प्रौद्योगिकियों के विकास पर अत्याधुनिक शोध किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस के प्रोफेसर दीपांजन रॉय के नेतृत्व में यह शोध भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित कई राष्ट्रीय परियोजनाओं के तहत संचालित किया जा रहा है।
1. शोर-शराबे में भी सुनने और समझने की क्षमता पर शोध
रोजमर्रा की जिंदगी में हम केवल ध्वनियों के जरिए ही नहीं, बल्कि सामने वाले के चेहरे के हाव-भाव और होंठों की गतिविधियों से बातचीत समझते हैं।
- इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन का प्रभाव: शोधकर्ताओं ने पाया कि मस्तिष्क को हल्की विद्युत उत्तेजना (Electrical Stimulation) देकर यह नियंत्रित किया जा सकता है कि वह देखी और सुनी गई जानकारियों को किस तरह जोड़ता है।
- ब्रेन वेव्स और श्रवण क्षमता: मस्तिष्कीय तरंगों (Brain Waves) के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि विशेष तरंगें हमारी सुनने-समझने की क्षमता में बदलाव ला सकती हैं।
- भविष्य का प्रभाव: यह तकनीक भविष्य में सुनने और बोलने में कठिनाई का सामना कर रहे लोगों के लिए उन्नत सहायक उपकरण (Assistive Technologies) और आधुनिक हियरिंग एड्स (Auditory Prosthetics) बनाने में क्रांतिकारी साबित होगी।
2. याददाश्त, बुढ़ापा और मानसिक बीमारियों का पूर्व-संकेत
बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ याददाश्त में आने वाली गिरावट (Memory Loss) को समझना एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है।
- टेक्नोलॉजी का उपयोग: EEG, MEG और एडवांस कम्प्यूटेशनल तकनीकों की मदद से यह देखा जा रहा है कि ध्यान केंद्रित करने की प्रक्रिया ‘वर्किंग मेमोरी’ को कैसे प्रभावित करती है।
- अग्रिम पहचान (Early Detection): इस शोध से मस्तिष्क में होने वाले शुरुआती बदलावों और संकेतों की पहचान की जा सकेगी, जिससे माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया जैसी गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारियों का शुरुआती चरण में ही इलाज संभव हो सकेगा।
3. मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं का सटीक अध्ययन
अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety) और OCD जैसी बढ़ती मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए आईआईटी जोधपुर की टीम वास्तविक जीवन जैसी परिस्थितियां तैयार कर fMRI (फंक्शनल एमआरआई) तकनीक का उपयोग कर रही है।
- शोध का उद्देश्य यह समझना है कि विभिन्न परिस्थितियों में मस्तिष्क भावनाओं को कैसे नियंत्रित करता है।
- इसके जरिए न्यूरोकॉग्निटिव मार्कर्स (Neurocognitive Markers) की पहचान की जा रही है, जिससे मानसिक रोगों की सटीक निगरानी और प्रभावी उपचार विकसित किया जा सके।
4. अचानक आए खतरों पर त्वरित प्रतिक्रिया और ADHD का इलाज
सड़क पार करते समय अचानक सामने आई तेज़ रफ्तार गाड़ी को देखकर मस्तिष्क पूरे शरीर को पल भर में सतर्क कर देता है।
- शोधकर्ताओं ने उन मस्तिष्कीय नेटवर्क और ब्रेन वेव्स की पहचान की है, जो अचानक घटने वाली घटनाओं पर हमारा ध्यान केंद्रित करते हैं।
- यह अध्ययन यह भी समझने में मदद करता है कि मस्तिष्क महत्वपूर्ण जानकारियों और गैर-जरूरी व्यवधानों में कैसे अंतर करता है, जिससे ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) जैसी ध्यान से जुड़ी समस्याओं के नए इलाज का मार्ग प्रशस्त होगा।
5. ब्रेन-इंस्पायर्ड AI और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएं
इस शोध का बड़ा उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को समाज के उपयोगी उपकरणों में बदलना है। यह तकनीक स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और ब्रेन-इंस्पायर्ड आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस (Brain-inspired AI) के क्षेत्र में नया आधार तैयार करेगी।
प्रोफेसर दीपांजन रॉय (IIT जोधपुर) ने कहा:
“मानव मस्तिष्क विज्ञान की सबसे जटिल प्रणालियों में से एक है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि मस्तिष्क जानकारी कैसे ग्रहण करता है और अनिश्चित परिस्थितियों में निर्णय कैसे लेता है। न्यूरोसाइंस, AI और ब्रेन इमेजिंग को जोड़कर हम ऐसे सिद्धांत विकसित करना चाहते हैं जो भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य, याददाश्त और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकें।”
कॉग्निटिव ब्रेन डायनेमिक्स लैब (CBDL) व IIT जोधपुर के बारे में:
- CBDL: न्यूरोसाइंस, AI, कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग और सिग्नल प्रोसेसिंग के जरिए मस्तिष्क के ध्यान, स्मृति, सीखने की क्षमता और मानसिक मजबूती पर शोध करने वाली प्रमुख प्रयोगशाला है।
- IIT जोधपुर: वर्ष 2008 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्थापित 852 एकड़ में फैला यह संस्थान AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, बायोसेंसिंग और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में बहुविषयक अनुसंधान का प्रमुख केंद्र है।