मानव गरिमा और सामाजिक न्याय की मिसाल बनेगा राजस्थान: ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, कौशल और सुरक्षा की गारंटी
जयपुर, 06 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
राजस्थान सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने मंगलवार को राजस्थान ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता इस समुदाय को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराना है।
गरिमा और समानता पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए अविनाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार इसे केवल एक वर्ग के मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि मानव गरिमा और सामाजिक न्याय के विषय के रूप में देख रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीसरे लिंग के रूप में दी गई मान्यता हमारे लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि है और राजस्थान सरकार इस गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

बैठक के मुख्य निर्णय और रणनीतियां
बोर्ड की बैठक में समुदाय के कल्याण हेतु कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई:
- अधिकारों का संरक्षण: ‘द ट्रांसजेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट 2019’ और ‘रूल्स 2020’ के प्रावधानों को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने पर विचार-विमर्श हुआ।
- पहचान प्रमाण पत्र: ट्रांसजेंडर्स के ज्यादा से ज्यादा पहचान प्रमाण पत्र (ID Cards) बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कोई बाधा न आए।
- अंतर्विभागीय समन्वय: समुदाय के व्यक्तियों को अन्य सरकारी विभागों की योजनाओं से जोड़ने और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सभी विभागों को समुचित परामर्श देने पर सहमति बनी।
- नीति निर्धारण: समुदाय की विशिष्ट समस्याओं का अध्ययन कर उनके समाधान के लिए नवीन योजनाओं के निर्माण और संचालन की रूपरेखा तैयार की गई।
प्रशासनिक निर्देश और अधिकारियों की सक्रियता
अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने अधिकारियों को विशेष रूप से ट्रांसजेंडर आईडी कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को सरल और तेज करने के निर्देश दिए।
बैठक में इन विभागों की रही उपस्थिति:
इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्त, विधि, श्रम, कॉलेज शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, प्राथमिक शिक्षा, राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास मिशन (RSLDC), युवा मामले, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि पुष्पा माई, निदेशक आशीष मोदी और राज्य महिला व बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए।

