मातृभाषा संरक्षण की अनूठी पहल: किशनगढ़ बास में 143 विद्यार्थियों ने दी सिंधी लर्निंग कोर्स की परीक्षा
| नरेश गुनानी
किशनगढ़ बास (खैरथल-तिजारा)। सिंधी भाषा के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में रविवार को किशनगढ़ बास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद (नई दिल्ली) के मार्गदर्शन और भारतीय सिंधु सभा राजस्थान न्यास के सहयोग से संचालित ‘सिंधी भाषा लर्निंग कोर्स’ की परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
तीन स्तरों पर परखी गई भाषाई दक्षता
माउंट ऑफिसर्स एस.एस.आई. स्कूल में आयोजित इस परीक्षा में कुल 143 विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। परीक्षा सुपरवाइजर हीरानंद और प्रीति भूरानी ने बताया कि परीक्षा को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
- सर्टिफिकेट कोर्स: 62 विद्यार्थी
- डिप्लोमा कोर्स: 52 विद्यार्थी
- एडवांस डिप्लोमा: 29 विद्यार्थी
परीक्षा केंद्र पर शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित किया गया, जहाँ विद्यार्थियों ने सिंधी लिपि और व्याकरण से संबंधित अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया।
सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने का संकल्प
परीक्षा के दौरान आयोजित चर्चा में वक्ताओं ने मातृभाषा के महत्व पर जोर दिया। केंद्र प्रभारी कन्हैयालाल भूरानी और सिंधी समाज के मुखी गोकुलदास मुगवानी ने कहा कि आज के दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहना अनिवार्य है। सिंधी भाषा के ये शैक्षणिक पाठ्यक्रम न केवल भाषा को जीवंत रखने का माध्यम हैं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आगामी समय में यहाँ सिंधी भाषा से जुड़े और भी बड़े शैक्षणिक व सांस्कृतिक आयोजन करने की योजना बनाई गई है।
प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिक और शिक्षाविद उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
प्रभु दयाल चन्दनानी, राजेश कामदार, राजेश पमनानी, लक्ष्मण दास, सुनील बत्रा, नेभराज बत्रा, दर्शन बत्रा, रमेश हरवानी, राजा मौरवानी, अनिल खुराना, सुनील हरवानी, विमल बत्रा शामिल थे।
वहीं, शिक्षण व्यवस्था में सिल्की मगनानी, पूजा भारती, कंचन भारती, योगिता वाधवा और संगीता नेवाणी जैसी शिक्षामित्रों का विशेष सहयोग रहा।

