मातृत्व सुरक्षा के 10 साल बेमिसाल: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के एक दशक पूरे, राजस्थान में रिकॉर्ड 4,120 सत्र आयोजित

नरेश गुनानी 

जयपुर, 09 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल पर शुरू किए गए ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (पीएमएसएमए) ने देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सफलता के ऐतिहासिक 10 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस गौरवमयी अवसर पर मंगलवार को राजस्थान भर के राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष पीएमएसएमए सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में हजारों महिलाओं को प्रसवपूर्व जांच, विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

​एक दशक में 7.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिला सुरक्षा कवच

​चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस मील के पत्थर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में यह अभियान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने वाली सबसे बड़ी जनकल्याणकारी पहल साबित हुआ है।

  • वैश्विक प्रभाव: पिछले 10 वर्षों में देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की 7 करोड़ 50 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं को इस अभियान के जरिए गुणवत्तापूर्ण और सुलभ प्रसवपूर्व स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त दी जा चुकी हैं।
  • सकारात्मक परिणाम: इस निरंतर प्रयास का ही नतीजा है कि देश और प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) तथा शिशु मृत्यु दर (IMR) में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

​स्वास्थ्य मंत्री ने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे गर्भावस्था के दौरान अपने निकटतम राजकीय स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर इस अभियान के तहत पंजीकरण कराएं, क्योंकि समय पर जांच से संभावित जटिलताओं को पहचानकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है।

​राजस्थान में हर महीने की 9, 18 और 27 तारीख को विशेष सत्र

​चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप राजस्थान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में सेवाएं दी जा रही हैं।

​”प्रदेश में यह अभियान हर महीने की 9, 18 और 27 तारीख को आयोजित किया जाता है। सरकारी डॉक्टरों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ (प्राइवेट गायनेकोलॉजिस्ट) भी इस अभियान में अपनी स्वैच्छिक सेवाएं दे रहे हैं, जिससे हर वर्ग की महिला को उच्च स्तरीय परामर्श मिल पा रहा है।”

गायत्री राठौड़, प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग

 

​इस अभियान की सबसे बड़ी यूएसपी उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों (High-Risk Pregnancy) की समय पर पहचान करना है। इसके तहत गंभीर एनीमिया (खून की कमी), हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और जुड़वां गर्भावस्था जैसी जटिलताओं की पहचान कर उनका समय रहते इलाज व मॉनिटरिंग की जा रही है।

​मंगलवार को आयोजित विशेष सत्रों का रिपोर्ट कार्ड

​एक दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में मंगलवार को राजस्थान में बड़े स्तर पर स्वास्थ्य गतिविधियों का संचालन और निरीक्षण किया गया:

  • कुल आयोजित सत्र: प्रदेशभर में 4,120 विशेष पीएमएसएमए सत्रों का आयोजन हुआ।
  • लाभान्वित महिलाएं: लगभग 60 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच की गई।
  • मां-वाउचर योजना: इसके तहत 13,211 गर्भवती महिलाओं को मुफ्त सोनोग्राफी के लिए कूपन जारी किए गए।
  • एनीमिया पर प्रहार: हीमोग्लोबिन का स्तर बेहद कम होने पर 3,800 से अधिक महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (FCM) इंजेक्शन की निःशुल्क डोज लगाई गई।

​सख्त मॉनिटरिंग और निरीक्षण

​अभियान की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के चिकित्सा अधिकारियों द्वारा सघन निरीक्षण किया गया। इसमें 1,369 वर्चुअल मॉनिटरिंग (ऑनलाइन समीक्षा) और 176 भौतिक निरीक्षण (ग्राउंड विजिट) शामिल रहे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सेवाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से अंतिम छोर तक पहुंचे।

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