माइंस विभाग का रिकॉर्ड प्रदर्शन: राजस्व में ₹627 करोड़ की भारी बढ़ोतरी, वसूली ₹7451 करोड़ के पार
जयपुर, 24 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
राजस्थान के माइंस विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रहण के अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विभाग ने 21 जनवरी तक 7,451.63 करोड़ रुपये का राजस्व जमा किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 627 करोड़ रुपये अधिक है। विभाग वर्तमान में 9 प्रतिशत की विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है।
राजस्व संग्रहण की नई रणनीति
वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों को देखते हुए प्रमुख सचिव माइंस टी. रविकान्त ने विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में राजस्व वसूली को और तेज करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की गई है।
प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल वर्तमान उपलब्धि पर संतोष न करें, बल्कि राजस्व संग्रहण के सभी संभावित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करें।
विभाग के मुख्य फोकस बिंदु:
बैठक में राजस्व बढ़ाने के लिए निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए:
- जुर्माना वसूली: अवैध खनन के विरुद्ध की गई कार्रवाई के दौरान तैयार किए गए पंचनामों पर त्वरित कार्रवाई कर जुर्माना राशि वसूलना।
- ठेकों की प्रभावी मॉनिटरिंग: आरसीसी (RCC) और ईआरसीसी (ERCC) ठेकों पर रॉयल्टी वसूली की कड़ी निगरानी करना।
- नीलामी प्रक्रिया: समाप्त हो रहे रॉयल्टी ठेकों और शेष बचे ठेकों की समयबद्ध नीलामी सुनिश्चित करना।
- नियमित समीक्षा: एसएमई (SME) और वित्त अधिकारी स्तर पर राजस्व की नियमित समीक्षा और विश्लेषण करना।
- बकाया वसूली: पुरानी और वर्तमान बकाया राशि की शत-प्रतिशत वसूली के लिए जिला कार्यालयों के साथ समन्वय स्थापित करना।
पिछले वर्ष की तुलना में प्रदर्शन
निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बैठक में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि:
- वित्तीय वर्ष 2024-25 (21 जनवरी तक): ₹6,824.54 करोड़ का राजस्व।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 (21 जनवरी तक): ₹7,451.63 करोड़ का राजस्व।
- कुल वृद्धि: ₹627.09 करोड़।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त सचिव माइंस अरविन्द सारस्वत, वित्त अधिकारी सुरेश चन्द्र जैन, अतिरिक्त निदेशक मुख्यालय महेश माथुर, विशेषाधिकारी श्रीकृष्ण शर्मा सहित अजमेर, जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर और राजसमंद के अधीक्षण खनि अभियंता उपस्थित रहे।