मांगलिक कार्यों में पंचदेवों की पूजा का महत्व:- बाबा-भागलपुर
लोकेंद्र सिंह शेखावत
भागलपुर, बिहार! सनातन धर्म में कोई भी नया कार्य करने से पहले सर्वप्रथम देवी-देवताओं का आवाहन और पूजन किया जाता है। हर मांगलिक कार्य में सबसे पहले पंचदेव की पूजा का विधान बताया गया है।
इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पं. आर. के. चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- सनातन धर्म में दैनिक पूजा और हर मांगलिक कार्य में सबसे पहले पंचदेव की पूजा का विधान है। इन पंचदेवो का मंत्रों के द्वारा आवाहन किया जाता है। जल से आचमन कराने के पश्चात पंचोपचार विधि से उनका पूजन किया जाता है। ऐसा माना गया है, मांगलिक कार्यों से पहले पंच देवो का पूजन करने से सारे कार्य बिना किसी विघ्न बाधा के संपन्न हो जाते हैं।
सूर्य, भगवान गणेश, शिव जी, भगवान विष्णु और आदिशक्ति माँ दुर्गा को पंचदेव माना गया है। हर शुभ कार्य में इनके पूजन का विधान है। सूर्य देव के पश्चात सबसे पहले भगवान गणेश तत्पश्चात शिव जी, माँ दुर्गा और विष्णु जी का पूजन किया जाता है।
सृष्टि के निर्माण में पांच तत्वों का बहुत महत्व हैं वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश। इन्हीं पंचतत्वों को आधार मानकर पंचदेव का पूजन किया जाता है।
सूर्य से ही सारी सृष्टि पर प्रकाश है सूर्य ही एक ऐसे देवता है जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। पंचतत्वो में सूर्य को आकाश का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सूर्य देव की पूजा की जाती है।
गणेश जी सभी देवों में प्रथम पूजनीय हैं। इन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। इसलिए हर मांगलिक कार्य में सबसे पहले इनकी पूजा की जाती है। जिससे कार्य निर्विघ्न रुप से संपन्न हो जाए।
दिन में पूजन क्रम में सूर्यादि पंच देवता का उच्चारण और रात में गणेशादि पंच देवता उच्चारण किया जाता है। जो सर्वविदित है।
भगवान शिव और शक्ति स्वरुपा माँ दुर्गा दोनों से ही सृष्टि का आरंभ है। यह समस्त जगत के माता-पिता हैं। माँ दुर्गा स्वयं प्रकृति हैं तो भगवान शिव देवों के देव, महादेव हैं। जीवन और काल भी इन्हीं के अधीन है।
भगवान श्री हरि विष्णु समस्त जगत के पालनकर्ता हैं। सृष्टि के संचालन का भार इन्हीं पर हैं। इसलिए हर शुभ कार्य में विष्णु जी की पूजा करने का प्रावधान है। देवउठनी एकादशी से विष्णु जी के जाग्रत होने के बाद ही मांगलिक कार्यों का आरंभ होता है।