नई दिल्ली / गौरव कोचर/
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से एक बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने कथित भड़काऊ भाषण (Hate Speech) के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्हें पुलिस जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।
”अंडों के हमले की आशंका से क्यों डरना?” — सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सांसद महुआ मोइत्रा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल को वर्चुअली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए) पुलिस के सामने पेश होने की अनुमति दी जानी चाहिए।
वकील ने कोर्ट को बताया:
जब सांसद पिछली बार थाने गई थीं, तो उनके ऊपर अंडे फेंके गए थे और दोबारा भी ऐसे ही विरोध प्रदर्शन व हमले की धमकियां मिल रही हैं।
कानून के तहत महिला को वर्चुअली जांच में शामिल होने का अधिकार है।
इस दलील पर जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कड़ी और मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:
“आप एक जनप्रतिनिधि और सांसद हैं। जब आपने राजनीति में कदम रखा है, तो क्या आप अंडों के फेंके जाने से डर रही हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपने सीने पर गोलियां खाई थीं। ऐसी याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आनी ही नहीं चाहिए।”
क्या है पूरा मामला?
- मामले की पृष्ठभूमि: नदिया जिले के होगलबेरिया थाने में तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित भड़काऊ टिप्पणी/भाषण देने को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
- हाईकोर्ट का रुख: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण तो दिया था, लेकिन साथ ही 14 अगस्त को जांच अधिकारी (IO) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूछताछ में सहयोग करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका वापस: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार करने के बाद, मोइत्रा के वकील ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जांच अधिकारी के सामने पेश होना पड़ेगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को जांच के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।