नरेश गुनानी/भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने दबदबे को बरकरार रखते हुए महिला एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 72 रनों से करारी शिकस्त दी। इस ऐतिहासिक जीत के साथ जहां मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों के खेल की तारीफ हो रही है, वहीं प्रजेंटेशन सेरेमनी के दौरान टीम इंडिया का एक कड़ा रुख भी सुर्खियों में आ गया है। भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
फाइनल का लेखा-जोखा: 183 रन बनाकर श्रीलंका को 111 पर समेटा
फाइनल मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने सधी हुई शुरुआत के बाद आक्रामक रुख अपनाया। टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट खोकर 183 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया। शीर्ष और मध्यक्रम के बल्लेबाजों के उपयोगी योगदान के चलते भारत ने विपक्षी टीम के सामने 184 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।
जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के सामने बेबस नजर आई। भारतीय गेंदबाजों के अनुशासित और आक्रामक स्पेल के चलते श्रीलंका की पूरी टीम 111 रनों पर ही ढेर हो गई। भारत ने यह खिताबी मुकाबला 72 रनों के बड़े अंतर से जीतकर एकतरफा अंदाज में ट्रॉफी अपने नाम की।
मोहसिन नकवी से ट्रॉफी न लेने पर बीसीसीआई का रुख
मैच समाप्त होने के बाद जब प्रजेंटेशन सेरेमनी की बारी आई, तो भारतीय टीम ने एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया। इस घटनाक्रम पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बोर्ड के रुख को सामने रखा।
देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि पुरुष टीम द्वारा अपनाए गए रुख की तरह ही महिला टीम ने भी यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा:
“एशिया कप में ट्रॉफी एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा रहा है। हमारी पुरुष टीम ने भी एशिया कप जीता था, लेकिन अप्रैल 2025 की पहलगाम घटना के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। इसके बाद देश के नागरिकों का हम पर भारी दबाव था कि हमें पड़ोसी देश के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहिए और न ही उनके साथ द्विपक्षीय क्रिकेट खेलना चाहिए।”
’मल्टीनेशनल टूर्नामेंट खेलने का मतलब सभी शर्तें मानना नहीं’
सैकिया ने भारत सरकार की कूटनीतिक और खेल नीतियों का हवाला देते हुए बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिबद्धताओं को निभा रहा है, लेकिन आत्मसम्मान की कीमत पर नहीं।
उन्होंने आगे कहा:
- सरकारी नीति का पालन: भारत सरकार की स्पष्ट नीति है कि मल्टीनेशनल टूर्नामेंट्स में भारत को सभी प्रतिस्पर्धी देशों के खिलाफ खेलना अनिवार्य है। इसी नीति के तहत भारतीय टीमें इन टूर्नामेंट्स में भाग ले रही हैं।
- कड़े फैसले की वजह: सैकिया ने जोर देकर कहा कि मल्टीनेशनल इवेंट्स में खेलने का अर्थ यह कतई नहीं है कि हम सभी शर्तें मान लेंगे। जिस देश के साथ हमारे कूटनीतिक रिश्ते बेहद खराब हैं और अप्रैल 2025 के बाद से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हुई है, उस देश के एक प्रमुख राजनेता व प्रशासनिक प्रतिनिधि (जो भारत विरोधी रुख रखते हैं) से भारतीय टीम कभी ट्रॉफी स्वीकार नहीं कर सकती।
- निरंतरता: लगभग डेढ़ साल पहले भारतीय पुरुष टीम ने एशिया कप जीतने के बाद इसी सिद्धांत के तहत ट्रॉफी लेने से मना किया था। महिला टीम ने भी राष्ट्रीय भावना और उसी नीति को आगे बढ़ाते हुए यह कड़ा कदम उठाया है।
महिला क्रिकेट के उभार पर बोर्ड ने जताई खुशी
विवाद से इतर बीसीसीआई सचिव ने हरमनप्रीत कौर और पूरी टीम के शानदार प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम का प्रदर्शन बेजोड़ रहा और टीम ने हर मुकाबला एकतरफा अंदाज में जीता। देश में महिला क्रिकेट का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है और इस खिताबी जीत ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय महिला क्रिकेट वैश्विक पटल पर नए आयाम स्थापित कर रहा है।