नरेश गुनानी
जयपुर, 24 अप्रैल 2026
शासन सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं पंचायती राज (महिला एवं बाल विकास) विभाग, पूनम ने शुक्रवार को सूचना केंद्र स्थित राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) हेल्पलाइन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभाग से संबंधित लंबित और निस्तारित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान पूनम ने डैशबोर्ड पर आंकड़ों का विश्लेषण करने के साथ-साथ विभिन्न जिलों से आई शिकायतों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के समाधान में केवल गति ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और पारदर्शिता भी अनिवार्य है।
प्रमुख निर्देश और प्राथमिकताएं
शासन सचिव ने अधिकारियों को शिकायत निस्तारण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- प्रक्रिया सुदृढ़ीकरण: सब्जेक्ट रिवीजन, लेवल मैपिंग और कैटेगरी निर्धारण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया जाए।
- ऑटो-एस्केलेशन: काउंसलिंग के बाद जिन मामलों में कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता हो, उन्हें संबंधित विभाग को स्वतः एस्केलेशन (Automatic Escalation) के माध्यम से भेजा जाए।
- घरेलू हिंसा के प्रति संवेदनशीलता: घरेलू हिंसा से संबंधित प्रत्येक परिवाद को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निपटाया जाए।
- कैजुअल डिस्पोजल पर रोक: शिकायतों को बिना ठोस समाधान के बंद करने (Casual Disposal) की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
आंकड़ों की स्थिति: निस्तारण दर और संतुष्टि
आरआईएसएल के महाप्रबंधक जी के शर्मा ने विभाग की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि हेल्पलाइन पर दर्ज मामलों में विभाग का प्रदर्शन सराहनीय रहा है:
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विवरण |
आंकड़े |
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कुल दर्ज प्रकरण |
31,325 |
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कुल निस्तारित प्रकरण |
30,213 |
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निस्तारण प्रतिशत |
96.45% |
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उपभोक्ता संतुष्टि दर |
71.95% |
मुख्यमंत्री की पहल का प्रभाव
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार, आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर 181 कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर स्वयं फीडबैक ले रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को अपनी शिकायतों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और उन्हें घर बैठे पारदर्शी तरीके से न्याय मिल सके।
निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्हें लंबित प्रकरणों के त्वरित और तथ्यात्मक निस्तारण के लिए पाबंद किया गया है।