महाशिवरात्रि से पूर्व अजमेर में गरमाया मुद्दा: दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक की मांग, कलेक्टर को लिखा पत्र
| हरि प्रसाद शर्मा
अजमेर। राजस्थान के अजमेर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व से ठीक पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर जिला कलेक्टर को एक औपचारिक पत्र लिखकर दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक और शिव पूजा करने की अनुमति मांगी है। इस मांग के बाद प्रशासन और स्थानीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
प्रमुख मांगें और तर्क
डॉ. परमार द्वारा भेजे गए पत्र में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
- धार्मिक अधिकार: पत्र में कहा गया है कि महाशिवरात्रि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, अतः शिवभक्तों को वहां रुद्राभिषेक करने का अधिकार मिलना चाहिए।
- ऐतिहासिक दावा: संस्था का दावा है कि अजमेर दरगाह परिसर मूल रूप से एक प्राचीन हिंदू शिव मंदिर है। वे इसे ऐतिहासिक तथ्यों और सनातन परंपराओं के आधार पर सिद्ध करने की बात कह रहे हैं।
- शांतिपूर्ण आयोजन का संकल्प: डॉ. परमार ने प्रशासन को आश्वासन दिया है कि यदि अनुमति मिलती है, तो यह अनुष्ठान पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा और कानून-व्यवस्था का पूरा सम्मान किया जाएगा।
न्यायालय में भी विचाराधीन है मामला
यह विवाद केवल पत्र तक ही सीमित नहीं है। डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर दरगाह के प्राचीन शिव मंदिर होने का दावा न्यायालय में भी पेश कर रखा है।
”हमने ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों के आधार पर याचिका दाखिल की है। सत्य को सामने लाना ही हमारा उद्देश्य है।” – डॉ. राजवर्धन सिंह परमार
इस कानूनी प्रकरण की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 21 फरवरी को होनी तय है, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
फिलहाल, इस मामले में जिला प्रशासन का रुख स्पष्ट नहीं है।
- इंकार: स्थानीय प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय की ओर से अभी तक ऐसा कोई पत्र आधिकारिक रूप से प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की गई है।
- सतर्कता: महाशिवरात्रि को देखते हुए शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
