जयपुर/ योगेश शर्मा/बढ़ती गर्मी, असंतुलित मौसम और पर्यावरण प्रदूषण की चुनौतियों के बीच जयपुर की ग्राम पंचायत कपुरा वाला के तेजावाला गांव में प्रकृति को सहेजने की एक अनूठी और अनुकरणीय पहल देखने को मिली। गांव में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मस्तराम बाबा की बगीची में रविवार को संत मस्तराम बाबा के सान्निध्य में एक वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धरती को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
छायादार, फलदार और औषधीय पौधों का रोपण
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रकृति की विविधता और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के पौधे लगाए गए। पर्यावरण प्रेमी दिनेश बागड़ा और अमित शर्मा ने बताया कि बगीची परिसर और उसके आसपास जामुन, बिल्वपत्र, पीपल, मधुकामिनी और रुद्राक्ष जैसे छायादार, फलदार व औषधीय पौधे रोपे गए। इन पौधों का चयन इसलिए किया गया ताकि ये न केवल भविष्य में छाया और फल दे सकें, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और पक्षियों के लिए भी मददगार साबित हों।
केवल पौधारोपण नहीं, संरक्षण की ली जिम्मेदारी
अक्सर देखा जाता है कि लोग पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में वे नष्ट हो जाते हैं। इस समस्या को समझते हुए इस कार्यक्रम में एक नई मिसाल पेश की गई। उपस्थित सभी लोगों ने केवल पौधे लगाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि हर पौधे को सुरक्षित रखने, उन्हें नियमित पानी देने और उनके बड़े होने तक पूर्ण संरक्षण करने की जिम्मेदारी उठाई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों के भीतर प्रकृति के प्रति प्रेम जगाना और पर्यावरण चेतना को हर घर तक पहुंचाना है।
”पौधारोपण को बनाना होगा जनआंदोलन”
इस मौके पर उपस्थित प्रहलाद शर्मा, रवि खोज और नरेंद्र खोज ने पर्यावरण के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा:
”आज हम बढ़ते प्रदूषण, लगातार घटते वन क्षेत्र और ग्लोबल वार्मिंग (जलवायु परिवर्तन) जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन समस्याओं से निपटने का एकमात्र और सबसे प्रभावी उपाय है—पौधारोपण। हमें इसे सरकारी या औपचारिक कार्यक्रम न मानकर एक ‘जनआंदोलन’ बनाना होगा। आज हमारे द्वारा लगाया गया एक छोटा सा पौधा भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, शुद्ध वातावरण और एक बेहतर, स्वस्थ जीवन का आधार बनेगा।”
ग्रामीणों में दिखा भारी उत्साह
संत मस्तराम बाबा के आशीर्वाद से शुरू हुए इस पुनीत कार्य में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई। ग्रामीणों ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि धार्मिक स्थलों से जब पर्यावरण संरक्षण का संदेश निकलता है, तो उसका समाज पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने जीवन के हर खास मौके (जैसे जन्मदिन या विवाह वर्षगांठ) पर कम से कम एक पौधा लगाने और प्रकृति को समृद्ध बनाने का संकल्प दोहराया।